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देश भर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम, मंदिरों में लगा श्रद्धालुओं का तांता

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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: भगवान विष्णु के आठवें अवतार के जन्मोत्सव की धूम, जानें क्यों मनाई जाती है और क्या है इसका महत्व है जाने विस्तृत रूप से

रितु मेहरा

जयपुर, (लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क)। देशभर में भक्ति, उत्साह और श्रद्धा के साथ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। यह त्योहार भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है, जो इस बार [तिथि डालें] को पड़ रही है। मंदिरों में सजावट, झांकियों, भजन-कीर्तन और मटकी फोड़ जैसे आयोजन से वातावरण भक्तिमय हो गया है।

क्यों मनाई जाती है जन्माष्टमी

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, द्वापर युग में मथुरा के राजा कंस के अत्याचारों से प्रजा दुखी थी। उसी समय भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर अधर्म का नाश करने और धर्म की स्थापना के लिए श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया। श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा की कारागार में, माता देवकी और वसुदेव के आठवें पुत्र के रूप में हुआ। जन्म के समय भारी वर्षा, कारागार के द्वार का स्वयं खुलना और यमुना नदी का मार्ग देना जैसे चमत्कार आज भी भक्तों के बीच चर्चा का विषय हैं।

इसके पीछे का धार्मिक राज

मान्यता है कि कृष्ण जन्म केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक संदेश है—अंधकार (रात) और संकट (कारागार) के बीच भी ईश्वर का प्रकाश और मुक्ति का मार्ग मिलता है। श्रीकृष्ण के जीवन से कर्म, प्रेम, नीति और भक्ति का मार्गदर्शन मिलता है।

धर्म और अध्यात्म:* जन्माष्टमी का त्योहार हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण है और भगवान कृष्ण के जन्म की खुशी में मनाया जाता है।

 *जीवन के आदर्श:* भगवान कृष्ण के जीवन से हमें कई आदर्श और मूल्य मिलते हैं जो हमारे जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जा सकते हैं

जन्माष्टमी की तिथि और समय:* 16 अगस्त 2025 को मनाई जाएगी जन्माष्टमी। अष्टमी तिथि 15 अगस्त को रात 11:49 बजे से शुरू होकर 16 अगस्त को रात 09:34 बजे तक रहेगी।

 *पूजा का शुभ मुहूर्त:* निशिता पूजा का समय 17 अगस्त को रात 12:04 बजे से 12:47 बजे तक रहेगा।

– *व्रत का पारण:* 17 अगस्त को सुबह 05:51 बजे के बाद व्रत का पारण किया जा सकता है.

*जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष आयोजन:*

 *मंदिरों में सजावट और भजन-कीर्तन:* मंदिरों में भगवान कृष्ण की झांकी सजाई जाती है और भजन-कीर्तन आयोजित किए जाते हैं।

 *घर-घर में माखन-मिश्री का प्रसाद:* इस दिन घरों में माखन-मिश्री का प्रसाद चढ़ाया जाता है और परिवार के साथ मिलकर त्योहार मनाया जाता है। *स्कूलों में कार्यक्रम: स्कूलों में भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा, मित्रता और जीवन दर्शन पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं ।

कौन लोग मानते हैं जन्माष्टमी

मुख्य रूप से यह पर्व हिंदू धर्मावलंबियों द्वारा मनाया जाता है, विशेषकर वैष्णव संप्रदाय के भक्तों के लिए इसका विशेष महत्व है। भारत के अलावा नेपाल, बांग्लादेश, मॉरीशस, फिजी, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, अमेरिका और ब्रिटेन में बसे भारतीय मूल के लोग भी जन्माष्टमी धूमधाम से मनाते हैं।

संस्कार और संस्कृति का संरक्षण: यह पर्व भारतीय सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं को जीवंत रखता है। आज के दिन युवा पीढ़ी भी बड़ी संख्या में व्रत रखती है भले ही वह आधुनिकता की बात करते हो लेकिन भगवान श्री कृष्णा में उनका अटूट विश्वास है।

उपवास और अनुष्ठान: जन्माष्टमी पर भक्त उपवास रखते हैं, रात्रि 12 बजे कृष्ण जन्मोत्सव मनाते हैं और माखन-मिश्री का भोग लगाते हैं।

इन मंदिरों में जुटते हैं लाखों श्रद्धालु

मथुरा, वृंदावन, द्वारका और जगन्नाथ पुरी, जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर करौली के राधा मोहन जी मंदिर में जैसे तीर्थस्थलों पर इस दिन विशेष आयोजन होते हैं, जो देशभर और विदेशों से श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं।

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