Home latest आरणी में गो माता को मिला न्याय, प्रशासन ने सुनी पुकार

आरणी में गो माता को मिला न्याय, प्रशासन ने सुनी पुकार

0

लोक टुडे न्यूज नेटवर्क 

धरना-भूख हड़ताल समाप्त, अल्पेश के खून-पत्र और नारायण–अमित की तपस्या से मिली जीत

 सत्यनारायण सेन गुरला


पाँच दिन के संघर्ष के बाद प्रशासन झुका

गुरला/राशमी क्षेत्र के आरणी में पिछले पाँच दिनों से जारी आंदोलन आखिरकार सफल रहा। गो माता के अधिकारों की रक्षा के लिए साधु-संतों और गोसेवकों ने धरना-भूख हड़ताल शुरू की थी। उनकी इस पुकार को सुनते हुए प्रशासन ने गोचर भूमि एवं गोस्वामी व नाथ समाज (शंकर घाटा) के रास्ते से अतिक्रमण हटवाया। यह कार्रवाई पुलिस की मौजूदगी में की गई।


मीडिया की गूंज से जागा प्रशासन

स्थानीय समाचार पत्रों और डिजिटल चैनलों ने अतिक्रमण की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसका सीधा असर प्रशासन पर पड़ा और संबंधित अधिकारियों ने हरकत में आकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित की।


संघर्ष की जीत: खून-पत्र और भूख हड़ताल

  • गोसेवक अल्पेश ने खून से पत्र लिखकर प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई थी।

  • वहीं अमित गिरी और नारायण गिरी ने भूख हड़ताल कर संघर्ष को और तेज़ कर दिया।

अंततः प्रशासन को झुकना पड़ा और गोचर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया।


आंदोलन में रहे प्रमुख संत और समाजजन

इस अभियान में कई संत, समाजजन और ग्रामीण एकजुट होकर खड़े रहे। प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:

अमित गिरी, नारायण गिरी, मनोहर गिरी, राजू गिरी, सत् गिरी, सागर गिरी, शंभु गिरी, नानू गिरी, सोनू सुखवाल, लक्ष्मण सुखवाल, अंबालाल सालवी, प्रकाश जाट, महेश गिरी, शांति गिरी, मदन सालवी, गोपाल गिरी, बद्री तेली, जीवन गिरी, रतन सुखवाल, संपत जाट, सत्तू गदरी, शंकर गदरी, हरीशंकर लोहार, संपत गिरी, कमलेश, भैरू।


निष्कर्ष: एकजुटता से मिली जीत

साधु-संतों, समाजजनों और ग्रामीणों की एकजुटता और संघर्ष के कारण ही यह आंदोलन सफल रहा। अंततः गो माता को न्याय मिला और गोचर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराकर एक मिसाल कायम हुई।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version