लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
भीलवाड़ा। (पंकज पोरवाल) हिन्दुस्तान जिंक के सीएसआर अंतर्गत संचालित सखी प्रोजेक्ट के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर विकसित भारत के विजन को सशक्त किया जा रहा है। इसी क्रम में रामपुरा आगुचा की सखी उड़ान समिति ने अपने गठन के 7 वर्ष पूर्ण होने पर भव्य वार्षिकोत्सव मनाया, जिसमें 3200 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया और अपने गांवों में आए सकारात्मक बदलावों की सशक्त प्रस्तुति दी।
विगत 9 वर्षों से भीलवाड़ा जिले की 10 ग्राम पंचायतों और 28 गांवों में सक्रिय सखी प्रोजेक्ट आज 300 स्वयं सहायता समूहों का मजबूत नेटवर्क बन चुका है। महिलाओं ने सामूहिक बचत के माध्यम से 2.26 करोड़ रुपये से अधिक की राशि एकत्र की है, वहीं 14.90 करोड़ रुपये से अधिक के आंतरिक वित्तीय लेनदेन कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है।
मंजरी फाउंडेशन के सहयोग से संचालित इस परियोजना के तहत महिलाओं ने किराना दुकान, सिलाई केंद्र, आटा चक्की, ब्यूटी पार्लर, चाय, फल-सब्जी, कॉस्मेटिक और ज्वेलरी जैसे व्यवसाय शुरू कर स्थायी आजीविका का मार्ग प्रशस्त किया है। इसके साथ ही कृषि और पशुपालन से भी आय में वृद्धि की है। मजबूत बैंक लिंकेज के चलते 85 स्वयं सहायता समूहों ने 1.99 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण लेकर अपने उद्यमों को विस्तार दिया है।
आज सखी महिलाएं केवल सहभागी नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर नेतृत्व करने वाली लीडर बन चुकी हैं। वे ग्राम सभाओं में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, सरकारी योजनाओं तक पहुंच सुनिश्चित कर रही हैं और पंचायतों के साथ मिलकर विकास कार्यों को गति दे रही हैं।
महिला सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण सुल्तानपुरा गांव की आशा देवी हैं, जो 2017 में सखी प्रोजेक्ट से जुड़ीं, 2019 में क्लस्टर फेडरेशन की अध्यक्ष बनीं और 2021 में सरपंच चुनी गईं। उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि सखी प्रोजेक्ट किस तरह महिलाओं को नेतृत्व और आत्मनिर्भरता की नई पहचान दे रहा है।
हिन्दुस्तान जिंक का सखी प्रोजेक्ट महिलाओं में निवेश कर समुदायों को मजबूत करने, समावेशी विकास को बढ़ावा देने और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
