लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
हेमराज तिवारी वरिष्ठ पत्रकार
भूमिका: जब आकाश भी पूछे — भारत, तुम कहाँ हो?
आधुनिक युद्ध अब केवल ज़मीन पर नहीं लड़े जाते, बल्कि हवा में वर्चस्व ही निर्णायक भूमिका निभाता है। और जब आसमान की बात हो, तो एक प्रश्न लगातार उठता है — भारत की वायु शक्ति वैश्विक स्तर पर कहाँ खड़ी है? हाल ही में भारतीय वायुसेना की झलकियों और सेन्य अभ्यासों ने यह सिद्ध किया है कि भारत न केवल अपनी पुरानी क्षमताओं को मजबूत कर रहा है, बल्कि 5वीं पीढ़ी के युद्धक विमानों की दिशा में भी तेज़ी से बढ़ रहा है।
भारत की वर्तमान वायुशक्ति: 4th और 4.5th जनरेशन जेट्स
भारत के पास इस समय दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में से कई शामिल हैं:
Sukhoi Su-30MKI – भारतीय वायुसेना की रीढ़, रूस के सहयोग से बना यह बहुउद्देश्यीय फाइटर जेट हवा से हवा और हवा से ज़मीन दोनों पर मार करने में सक्षम है।
Mirage 2000 – 1999 के कारगिल युद्ध में इसकी निर्णायक भूमिका को कोई नहीं भूल सकता।
Rafale – फ्रांस से आया यह 4.5th जनरेशन फाइटर भारत की रणनीतिक शक्ति को नया मुकाम देता है।
HAL Tejas – भारत में निर्मित हल्का लड़ाकू विमान, जो आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है।
इन सभी विमानों की तैनाती ने भारत को न केवल दक्षिण एशिया में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक मजबूती दी है।
भविष्य की उड़ान: AMCA और 5th जनरेशन का सपना
सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि भारत अब 5th Generation फाइटर एयरक्राफ्ट की दौड़ में भी शामिल हो चुका है।
AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) नामक यह परियोजना भारत को आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति की ओर अग्रसर करती है।
इसमें stealth technology, supercruise, sensor fusion, और AI-based warfare systems जैसी अत्याधुनिक क्षमताएं होंगी।
यह विमान भारत को न केवल चीन या पाकिस्तान से एक कदम आगे रखेगा, बल्कि रक्षा निर्यात में भी नई संभावनाओं का द्वार खोलेगा।
भ्रांतियों से बाहर, आत्मनिर्भरता की ओर
कुछ आलोचक आज भी मानते हैं कि भारत को पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर भरोसा करने में अभी समय लगेगा। परंतु HAL Tejas और AMCA जैसी परियोजनाएं इस मिथक को तोड़ रही हैं। भारत अब नकल नहीं, नवाचार की राह पर है। 2025 के बाद जब AMCA अपनी पहली उड़ान भरेगा, तो भारत पहली बार एक पूरी तरह से stealth-based indigenous 5th gen fighter के साथ वैश्विक शक्तियों की सूची में खुद को स्थायी दर्जा देगा।
राजनीतिक इच्छाशक्ति और वैज्ञानिक प्रतिबद्धता की परीक्षा
इस राह में केवल वैज्ञानिक तकनीक नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और दीर्घकालिक रणनीतिक नीति की भी आवश्यकता है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और वायुसेना के बीच समन्वय जितना प्रबल होगा, उतना ही तेज़ भारत का आकाश में प्रभुत्व होगा।
जब कोई बच्चा आसमान की ओर देखता है और कहता है – “मैं पायलट बनूंगा”, तो वह सिर्फ एक सपना नहीं देख रहा होता — वह भारत की अगली उड़ान का संकेत दे रहा होता है। आज भारत केवल लड़ाकू विमान नहीं बना रहा, वह आत्मविश्वास बना रहा है, तकनीकी स्वतंत्रता रच रहा है, और आने वाली पीढ़ियों के लिए “भारत की उड़ान” का नक्शा तैयार कर रहा है।
“जहाँ दूसरे देश युद्ध के लिए ताकत जुटाते हैं, भारत शांति के लिए शक्ति संजोता है।”
भारत का आसमान अब केवल नीला नहीं, आत्मनिर्भरता से रंगा हुआ है।
