लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
अध्ययन में पर्यावरण बचाने के लिए पर्यटन पर नियंत्रण की सिफारिश
सत्यनारायण सेन, गुरला।
उत्तराखंड के चार धाम — केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री — में बढ़ते पर्यटक दबाव को देखते हुए अब प्रतिदिन सीमित संख्या में ही तीर्थयात्री जा सकेंगे। साइंटिफिक रिपोर्ट्स पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, सरकार को स्थायी अपशिष्ट प्रबंधन और वाहनों की सीमा तय करने जैसे कदम उठाने होंगे ताकि इन तीर्थस्थलों की नाजुक पारिस्थितिकी सुरक्षित रहे।
अध्ययन में बताया गया है कि प्रतिदिन बद्रीनाथ में 15,778, केदारनाथ में 13,111, गंगोत्री में 8,178 और यमुनोत्री में अधिकतम 6,160 पर्यटक ही आ सकेंगे।
शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि नए पर्यटन स्थल घाटियों के भीतर या किनारों पर विकसित न किए जाएं और बुनियादी ढांचे की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही, 4,200 मीटर से अधिक ऊंचाई और तीव्र ढलान वाले क्षेत्र पर्यटन विकास के लिए अनुपयुक्त बताए गए हैं।
अध्ययन में चेताया गया है कि 2002 से 2020 के बीच चारों धाम क्षेत्रों में बर्फ आवरण में 14 से 22 मीटर प्रति वर्ष की दर से कमी आई है, जिससे क्षेत्र में भूस्खलन और जलवायु असंतुलन का खतरा बढ़ा है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि “चार धाम” में पर्यटन तभी टिकाऊ रहेगा जब आगंतुकों की संख्या पर नियंत्रण, अपशिष्ट प्रबंधन और स्थानीय समुदायों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।













































