लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
गोविंद सिंह डोटासरा बोले — “चुनाव टालने की साजिश”
जयपुर ।
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य में एसआईआर (स्पेशल समरी रिविजन) की घोषणा पर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर की घोषणा नियमों के विपरीत की गई है, क्योंकि प्रदेश में नगर निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव पिछले एक साल से लंबित हैं।
“वन स्टेट–वन इलेक्शन” केवल जुमला: डोटासरा
डोटासरा ने कहा कि भाजपा सरकार ने पहले बजट में “वन स्टेट–वन इलेक्शन” की बात कही थी, लेकिन अब तक न तो बैठक हुई, न ही कोई सर्कुलर जारी हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल चुनाव टालने के लिए इस नारे का इस्तेमाल कर रही है।
उन्होंने कहा,
“49 नगर निकायों का कार्यकाल नवंबर 2024 में समाप्त हो चुका है और 11,310 ग्राम पंचायतें पहले ही प्रशासकों के हवाले की जा चुकी हैं। परिसीमन (delimitation) समय पर न करवाकर सरकार चुनाव प्रक्रिया को जानबूझकर रोक रही है।”
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में देरी से सरकार को मिला बहाना
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि ओबीसी आयोग का गठन भी देरी से किया गया। सुप्रीम कोर्ट के 2022 के आदेश के अनुसार, ओबीसी आरक्षण आयोग की रिपोर्ट के बाद ही निकाय और पंचायत चुनाव कराए जा सकते हैं, लेकिन राज्य सरकार ने आयोग को कोई संसाधन या बजट नहीं दिया, जिससे रिपोर्ट आज तक प्रस्तुत नहीं हो सकी।
उन्होंने कहा,
“अप्रैल 2025 में आयोग बना, जबकि चुनाव नवंबर 2024 में होने थे। अब आयोग के पास स्टाफ, बजट और फील्ड सर्वे के लिए बीएलओ तक नहीं हैं। यह सब चुनाव टालने की सोची-समझी चाल है।”
भाजपा पर आरोप — “वोट चोरी की तैयारी”
डोटासरा ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि एसआईआर करवाने का मकसद वोटर लिस्ट में हेराफेरी करना है।
“हरियाणा और महाराष्ट्र की तरह राजस्थान में भी भाजपा गलत तरीके से वोटर लिस्ट में नाम काटकर वोट चोरी करना चाहती है,” उन्होंने कहा।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि भाजपा ने यह लिखित में निर्वाचन आयोग को दिया है कि फरवरी से पहले कोई चुनाव नहीं होंगे, ताकि एसआईआर करवाई जा सके। जबकि नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि जिस राज्य में चुनाव ड्यू हों, वहां एसआईआर नहीं हो सकता।
संविधान के उल्लंघन का आरोप
डोटासरा ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 243(E) (पंचायती राज) और 243(U) (नगर निकाय) के अनुसार, पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर चुनाव समय पर होना अनिवार्य है।
“भाजपा को संविधान की परवाह नहीं है। विधायक और सांसदों के चुनाव समय पर हो सकते हैं तो पंचायत और निकायों के क्यों नहीं?”
“भाजपा सरकार ब्यूरोक्रेसी के सहारे शासन चला रही”
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने राज्य की स्थानीय संस्थाओं को ब्यूरोक्रेसी के हवाले कर दिया है।
“22 महीने में 22 निकाय चेयरमैनों को हटाया गया। कोर्ट से बहाल होने के बाद भी उन्हें फिर हटा दिया गया। यह लोकतंत्र का मज़ाक है।”
कांग्रेस की तैयारी पूरी
डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने भाजपा की चाल को नाकाम करने की तैयारी पूरी कर ली है।
“प्रदेश के 52,000 बूथों में से 51,000 पर बीएलए नियुक्त कर दिए गए हैं, बाकी भी दो दिन में पूरे हो जाएंगे। 200 विधानसभा क्षेत्रों में ऑब्जर्वर नियुक्त किए जा रहे हैं जो एसआईआर प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।”
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार कितने भी बहाने बनाए, लेकिन अंततः पंचायती राज और नगर निकायों के चुनाव कराने ही पड़ेंगे, और उस समय जनता भाजपा की “सच्चाई” देख लेगी।



















































