लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
आध्यात्मिक वातावरण में देर रात तक चली महफ़िल, दो छात्राओं के परिवारों को किया गया सम्मानित
उनियारा (सत्यप्रकाश मयंक)।
शहर में बुधवार रात नमाज़-ए-ईशा के बाद जश्ने गौसे आज़म की रौशन और आध्यात्मिक महफ़िल श्रद्धा, अनुशासन और प्रेम के साथ आयोजित की गई। देर रात तक चली इस महफ़िल में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की।
मुख्य तक़रीर और संदेश
कार्यक्रम की मुख्य तक़रीर पीर-ए-तरीक़त, ख़लीफ़ा-ए-शेख़ुल इस्लाम मौलाना मुफ़्ती ख़ालिद अय्यूब मिस्बाही (शेरानी आबाद, राजस्थान) ने पेश की।
उन्होंने गौसे आज़म की शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा—
“मुसलमानों को जीवन में ज्ञान, कर्म और प्रेम की राह अपनानी चाहिए।”
दूसरे विशिष्ट वक्ता मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद हसन रज़ा क़ादरी मुस्तफ़ाई (जयपुर) ने समाज में एकता, भाईचारे और इंसानियत पर जोर दिया।
ख़िलाफ़त प्रदान की गई
इस अवसर पर पीर-ए-तरीक़त मुफ़्ती ख़ालिद अय्यूब मिस्बाही ने मौलाना अरबाज रज़ा क़ादरी मुजद्दिदी को सिलसिला-ए-नक्शबंद की ख़िलाफ़त (आध्यात्मिक उत्तराधिकार) प्रदान की। इस पल पर उपस्थित सभी लोगों ने खुश होकर दुआएं दीं।
महफ़िल की झलकियां
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कार्यक्रम की शुरुआत क़ारी सलाउद्दीन (टोंक) की तिलावत-ए-कुरआन से हुई।
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महफ़िल की सरपरस्ती शकील अहमद क़ादरी ने की और संचालन हाफ़िज़ कामिल रज़ा क़ादरी ने किया।
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शाकिर क़ादरी की नातों से माहौल में रूहानियत और शांति फैल गई।
आलिमा छात्राओं के परिवारों को सम्मान
इस अवसर पर तहरीक उलमा-ए-हिंद के ऑनलाइन आलिमा कोर्स पूरा करने वाली उनियारा की दो छात्राओं के पिता — मुहम्मद यूनुस भाई लोहार और जहीर अहमद रंगरेज़ — को सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
ये दोनों छात्राएँ उनियारा की पहली बेटियाँ हैं जिन्होंने यह कोर्स पूरा किया है।
उपस्थित श्रद्धालु
मदीना मस्जिद कमेटी के सदर शकील अहमद क़ादरी, सेक्रेटरी अब्दुल सत्तार क़ादरी, नायब सदर जहीर अहमद रंगरेज़ सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे। सभी ने जश्ने गौसे आज़म की इस रूहानी महफ़िल में शिरकत की।
इसाल-ए-सवाब और सामूहिक दुआ
यह महफ़िल मरहूम दिलदार खाँ, मरहूमा सकीना बी और मरहूम जमी़ल अहमद गहलोत की रूह की शांति के लिए आयोजित की गई थी।
कार्यक्रम के अंत में देश और समुदाय की सलामती, अमन-ओ-चैन और तरक्की के लिए सामूहिक दुआ की गई।


















































