लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
251 श्रद्धालुओं के साथ 7 किलोमीटर की यात्रा, “जय गोविंदा” से गूंजा नगर
भीलवाड़ा। (पंकज पोरवाल)
शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर तिरुपति सेवा समिति एवं तिरुपति पदयात्री संघ के तत्वावधान में पहली बार भव्य तिरुपति रथ पदयात्रा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर शहर में भक्ति, आस्था और दक्षिण भारतीय संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
पैच बालाजी मंदिर से शुभारंभ
यात्रा का शुभारंभ दोपहर 2 बजे पैच बालाजी मंदिर से हुआ, जहाँ भगवान वेंकटेश्वर की प्रतिमा सजे हुए रथ पर विराजित की गई।
पंडित आशुतोष शर्मा और पंडित शिवप्रकाश जोशी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यात्रा का आरंभ कराया।
7 किलोमीटर की भक्तिमय यात्रा
रथ यात्रा रेलवे स्टेशन, गायत्री आश्रम चौराहा और जोधड़ास फाटक होते हुए लक्ष्मीपुरा तिरुपति मंदिर तक पहुंची।
पथ में भक्त लगातार “जय गोविंदा, जय वेंकटेश” के उद्घोष करते हुए नाचते और गाते आगे बढ़े। बैंड बाजों और पुष्पवृष्टि से पूरा नगर भक्तिमय हो गया।
भक्त दक्षिण भारतीय परिधान में सजे थे — महिलाएं पारंपरिक साड़ी में और पुरुष धोती या अंगवस्त्र में। वातावरण ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो “दक्षिण भारत उत्तर भारत में उतर आया हो।”
महाप्रसाद और विशेष आरती
श्रद्धालु परिवार लगभग 7–8 किलोमीटर पैदल चलकर तिरुपति मंदिर पहुँचे। वहाँ विशेष आरती और महाप्रसाद का आयोजन हुआ। पूरे मार्ग में भक्तिभाव और जयघोष से शहर का हर कोना गूंजता रहा।
आयोजन को सफल बनाने में श्रृद्धालुओं का योगदान
आयोजन को सफल बनाने में सुरेश तोषनीवाल, महेश पुरी, राधेश्याम तोषनीवाल, अनिता गुर्जर, विनिता तोषनीवाल सहित अनेक श्रद्धालुओं ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
समिति ने सभी भक्तों और शहरवासियों का आभार व्यक्त किया और बताया कि यह पदयात्रा आने वाले वर्षों में और भी भव्य रूप में आयोजित की जाएगी।















































