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नरेश मीणा ने पूर्व मंत्री भारत सिंह कुंदनपुर ,राजेंद्र गुढ़ा, मातादीन गुर्जर और मृतक बच्चों के परिजनों के सामने तोड़ा आमरण अनशन
लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
जयपुर। झालावाड़ के पिपलोदा में सरकारी स्कूल भवन में गिरने से सात बच्चों की मौत के बाद 50-50 लाख रुपए मुआवजे की माँग को लेकर आमरण अनशन कर रहे नरेश मीणा ने आज अपना अनशन तोड़ दिया। मीणा ने कहा कि उनका अनशन 15 दिन तक चला और इस दौरान सरकार की ओर से किसी वार्ता का एक भी प्रयास नहीं किया गया। यह लोकतांत्रिक सरकार की हद्धार्मिता की पराकाष्ठा है।
सरकार की संवेदनहीनता आई सामने
मीणा का आरोप है कि इस पूरे मुद्दे को लेकर जो उठाए गए प्रयास और उनकी आवाज़ दलित आदिवासी बच्चों के परिजनों को न्याय दिलाने की विधि क्योंकि इससे पूर्व भी गहलोत सरकार के दौरान उदयपुर में कन्हैयालाल की हत्या और जयपुर में एक मुस्लिम युवक की हत्या के मामले में सरकार ने 50 लख रुपए मुआवजा और सरकारी नौकरी दी थी इस बार तो साथ बच्चों की बहुत सरकार की लापरवाही से ही हुआ हुई है सरकारी स्कूल में बिल्डिंग गिरने से हुई है तो जाहिर सी बात है कि इस तरह के हाथों में सरकार को खुद आगे बढ़कर मदद करनी चाहिए थी लेकिन सरकार ने 10-10 लाख देकर इतनी सारी यह दलित आदिवासी बच्चों का अपमान है। खास बातें की 15 दिन तक चल आवारा नंदन के बावजूद आज तक सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे किसी भी तरह की वार्ता के लिए नहीं मिला लोकतंत्र में इस तरह की हार्ट धर्मिता नहीं चलती है लेकिन सरकार की इस रवैया से अब नरेश मीणा गांधी वाली तरीके से नहीं भगत सिंह के तरीके से लड़ाई लड़ेगा आने वाले समय में सरकार के खिलाफ मोर्चा खुलेगा प्रदेश में कहीं भी दलित आदिवासी और कमजोर वर्गों के खिलाफ अत्याचार होंगे तो वह उनकी लड़ाई लड़ेंगे और संघर्ष करेंगे इस सरकार को झुकने पर मजबूर करेंगे।
मीणा ने कहा कि यह मामला केवल व्यक्तिगत या राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक तबकों — दलित, आदिवासी व ओबीसी वर्ग — के साथ हुए अन्याय का प्रतिनिधि मामला है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य मृतक बच्चों के परिजनों को न्याय और आर्थिक सहायता दिलवाना था, लेकिन सरकार की अनदेखी के कारण उन्होंने अनशन किया। मीणा ने कहा, “मैंने यह अनशन अपने उन बच्चों के लिए रखा जो सरकारी व्यवस्थाओं के चलते शहीद हुए। मैं चाह रहा था कि परिवारों को 50-50 लाख रुपए का मुआवजा मिले — इसके लिए मैं संघर्ष कर रहा था।”
आने वाले समय में सरकार को घेरने में कसर नहीं छोड़ेंगे
अनशन तोड़ते हुए मीणा ने सरकार को चेतावनी भी दी: “अगर हमारी सुनवाई नहीं हुई तो मैं एक बार फिर व आन्दोलन करूँगा — पर इस बार गांधी की तरह नहीं, भगत सिंह की तरह। मैं लाखों लोगों के साथ जयपुर आकर अपनी बात उठाऊँगा।” उन्होंने यह भी कहा कि वे आने वाले ढाई वर्षों में चुप नहीं बैठेंगे और जहां भी दलित, आदिवासी और गरीबों पर अन्याय होगा, उनकी आवाज़ उठाते रहेंगे।
भामाशाह मातादीन गुर्जर ने दिए 51 लाख रुपए
मीणा ने साथियों, समर्थकों और उन लोगों का आभार भी व्यक्त किया जिन्होंने अनशन के दौरान उनका साथ दिया। उन्होंने यह बताया कि आज भी भामाशाह मतादीन गुर्जर ने मृतक बच्चों के परिजनों को सहायता के रूप में 51 लाख रुपए की सहायता उपलब्ध करवाई है। मीणा ने कहा कि यह दान बच्चों के परिजनों को थोड़ा आर्थिक सहारा दे सकेगा।
मीणा ने यह भी कहा कि पूर्व मंत्री भारत सिंह कुंदनपुर सवाई मानसिक अस्पताल में भर्ती हैं और वे ईमानदार नेता रहे हैं जिन्होंने अपने कार्यकाल में कई बार सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाई। मीणा ने बताया कि कई नेताओं ने उन्हें अनशन तोड़ने का आग्रह किया था, पर उन्होंने तब तक अनशन नहीं तोड़ा जब तक उनके साथियों ने मदद पहुँचाई और परिजनों को कुछ राशि उपलब्ध करवाई गई।
आगे क्या कदम उठाए जाएंगे — इस पर मीणा ने कहा कि वह और उनके साथी अभी भी संघर्ष जारी रखेंगे और मृतक बच्चों के परिजनों को न्याय व मुआवजा दिलवाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
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