लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
वल्लभनगर, बड़गांव और घोसूंडा बांध अभी भी अधूरे
उदयपुर।
देवास प्रोजेक्ट-2 के तहत 379 करोड़ रुपये की लागत से बना आकोदड़ा बांध ओवरफ्लो हो गया है। इसका पानी अब मानसी वाकल बांध में जा रहा है। मानसी वाकल बांध मात्र 20 सेंटीमीटर खाली है और कभी भी इसके गेट खोलने पड़ सकते हैं। गेट खुलते ही मेवाड़ के हिस्से का पानी सीधा गुजरात पहुंच जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जलसंसाधन विभाग समय रहते आकोदड़ा, मादड़ी और देवास प्रथम (अलसीगढ़) बांध का पानी उदयपुर की झीलों की ओर डायवर्ट करता तो यह स्थिति नहीं बनती।
खाली हैं मेवाड़ के बांध
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वल्लभनगर बांध – क्षमता के मुकाबले सिर्फ 54.71% भरा है। जलस्तर 19.50 फीट के मुकाबले 13.3 फीट।
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बड़गांव बांध – 7.62 मीटर की क्षमता में मात्र 4.69 मीटर पानी।
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घोसूंडा बांध – 423 आरएलमीटर के मुकाबले सिर्फ 419.35 आरएलमीटर।
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मादड़ी बांध – 34 फीट क्षमता में 27.6 फीट तक भरा, ओवरफ्लो होने पर पानी सीधा मानसी वाकल जाएगा।
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देवास प्रथम (अलसीगढ़) – 34 फीट के मुकाबले 29 फीट भर चुका है, ओवरफ्लो का पानी भी गुजरात की ओर जाएगा।
बड़ा सवाल – आकोदड़ा बांध की जरूरत क्यों?
मानसी वाकल बांध को भरने के लिए यदि आकोदड़ा से ही पानी डायवर्ट करना था, तो सवाल उठता है कि उसी नदी पर अलग से आकोदड़ा बांध बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
देवास प्रोजेक्ट-2 के तहत:
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302 एमसीएफटी क्षमता का आकोदड़ा बांध बनाया गया।
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11.5 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण किया गया।
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85 एमसीएफटी भराव क्षमता वाला मादड़ी बांध भी आकोदड़ा की मुख्य सुरंग से जोड़ा गया।
इस पूरी योजना का उद्देश्य उदयपुर की झीलों – पीछोला, फतहसागर, उदयसागर और आगे चलकर वल्लभनगर बांध को भरना था। इसके बाद अतिरिक्त पानी से बड़गांव और घोसूंडा बांध भी भरने थे।
अधिकारियों की लापरवाही पर सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जलसंसाधन विभाग के अफसर दिनभर एसी चैंबर में बैठकर फाइलों में मंथन करते रहे और समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
यदि टनल से आकोदड़ा और मादड़ी बांध का पानी डायवर्ट कर उदयपुर की झीलों में छोड़ा जाता तो न केवल बांध भरते, बल्कि क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलता और भूजल स्तर में भी सुधार आता।














































