“सत्त्व कथक उत्सव” : जयपुर में शास्त्रीय नृत्य की अद्भुत संध्या

0
88
- Advertisement -

लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

जयपुर ।
कलावर्त प्रेरणा श्रीमाली कथक केंद्र, जयपुर द्वारा आयोजित “सत्त्व कथक उत्सव” ने महाराणा प्रताप सभागार में शास्त्रीय नृत्य प्रेमियों को एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान किया। यह विशेष संध्या कथक के शुद्ध, पारंपरिक और सात्त्विक स्वरूप की गहन प्रस्तुति रही, जिसने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत

उत्सव का शुभारंभ गुरु प्रेरणा श्रीमाली जी की रचित गणेश परण की सधी हुई पढ़ंत और तुलसीदास रचित राम स्तुति से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

मुख्य प्रस्तुतियां

  • तीनताल विलंबितमनीषा गुलयानी और मनस्विनी शर्मा का प्रभावशाली युगल

  • ताल धमारमनस्विनी शर्मा का सशक्त एकल

  • राग मालकौंस में तरानामीना रेड्डी और बृजकिशोर सक्सेना का मोहक युगल

  • अभिनय ठुमरी और तीनताल द्रुत लयमनीषा गुलयानी का ऊर्जावान एकल

संध्या का समापन सभी कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति अतिद्रुत तत्कार से हुआ, जिसने पूरे सभागार में ऊर्जा और उत्साह का संचार किया।

विशेष आकर्षण

  • प्रस्तुत तराना महान गुरु कुंदनलाल गंगानी द्वारा रचित था।

  • अभिनय ठुमरी पारंपरिक रचना “छाड़ो छाड़ो जी बिहारी, नारी देखे सगरी” पर आधारित रही।

अतिथि व संगत

साहित्यकार श्री अशोक वाजपेयी ने विशेष अतिथि के रूप में कथक की शास्त्रीयता, उसकी गहराई और समय की प्रासंगिकता पर प्रभावशाली विचार साझा किए।

संगीत संगत में –

  • तबला : परमेश्वर कथक

  • पखावज : प्रवीण आर्य

  • सितार : मोहम्मद इरफान

  • गायन व नग़मा : मुन्नालाल भाट

कलावर्त की साधना

कलावर्त, पिछले साढ़े तीन वर्षों से गुरु प्रेरणा श्रीमाली जी के मार्गदर्शन में, जयपुर में कथक की शास्त्रीय परंपरा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार हेतु सक्रिय है। “सत्त्व कथक उत्सव” इस सतत साधना और सृजनशीलता का प्रतीक बनकर सामने आया, जिसमें गुरु-शिष्य परंपरा की आत्मा को मंच पर सजीव किया गया।

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here