एक परिवार 25 वर्षों से बना रहा है बाबा रामदेव जी के लिए ध्वजा

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

जोधपुर । (दयाल सिंह सांखला)पश्चिमी राजस्थान के धार्मिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में बाबा रामदेव जी का मेला अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है, जिसे ‘पश्चिम का महाकुंभ’ भी कहा जाता है। भादवा मास की शुरुआत के साथ ही यह मेला धूमधाम से प्रारंभ होता है। इस मेले का प्रमुख आकर्षण समाधि स्थल तक विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं की पैदल यात्रा है, जिसमें प्रत्येक श्रद्धालु के हाथ में एक ध्वज होता है।

बाबा रामदेव जी के भक्त अजय सांसी ने बताया कि रतनाड़ा की सांसी बस्ती का गोमाणी परिवार पिछले 25 वर्षों से इस यात्रा को विशेष बनाने का कार्य कर रहा है। इस परिवार की परंपरा के अनुसार हर साल एक विशालकाय ध्वज तैयार किया जाता है, जिसकी खड़े में ऊँचाई 40 से 70 फीट तक होती है। यह ध्वज विशेष रूप से डिजाइन किया जाता है, जो यात्रा की भव्यता और श्रद्धा को दर्शाता है। ध्वज का आकार और डिजाइन हर साल पहले से बड़ा और सुंदर होता है, जो परिवार की गहरी श्रद्धा और समर्पण को प्रकट करता है। यात्रा के दौरान यह ध्वज धूमधाम और उत्साह के साथ प्रदर्शित किया जाता है।

परिवार की मुखिया लक्ष्मी देवी गोमाणी ने बताया कि इस परंपरा की शुरुआत उन्होंने की थी, और आज पूरा परिवार इस कार्य में सेवा भाव से जुटा हुआ है। वे पवित्र ध्वजों को पूरी श्रद्धा और समर्पण से तैयार करते हैं। वर्तमान परिस्थितियों मैं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी ध्यान रखा जाता है ध्वज में लोहे के सामान का उपयोग नहीं किया जाता; केवल कपड़े और लकड़ी से बने ध्वज को तैयार किया जाता है, ताकि यात्रा के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना न हो और ध्वज को ले जाते समय कोई समस्या न हो। परिवार की सेवा और समर्पण के कारण यह परंपरा आज सभी के बीच नई ऊर्जा और उल्लास का प्रतीक बन गई है।

गोमाणी परिवार पिछले 25 वर्षों से बाबा रामदेव जी की पैदल यात्रा के लिए विशेष ध्वज तैयार करता आ रहा है। उनकी सेवा और समर्पण इस यात्रा को और भी भव्य और आकर्षक बनाते हैं।

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