अनुशासन को जीवन में अपनाएं और घर, परिवार, समाज में अच्छा संदेश दे- परमालय

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तालिया की गड़गड़ाहट से गूंजा परिसर
— लोगों में दिखा अति उत्साह
–सुबह, दोपहर और सायंकाल भोजन का बताया डिजाइन

3 जून 2025 को पुन: मिलने के साथ नए दृष्टिकोण वाले शिविर का समापन

जयपुर। हमारा जीवन अनुशासन से चलता है। जीवन में कुछ भी काम करना होगा तो उसके लिए
अनुशासन बहुत जरूरी होता है। यदि हम स्वयं अनुशासन में रहेंगे तो हीं हमारे घर का हर सदस्य अनुशासन में रहेंगा। हम अनुशासन में रहकर छोटे बड़ों को फॉलो करते हैं। अनुशासन से ही हम अपने व्यापार चला सकते हैं, अनुशासन से ही शरीर ठीक रख सकते हैं, अनुशासन से ही अपना परिवार व्यवस्थित रूप से चला सकते हैं। हर चीज में सफलता के लिए अनुशासन बहुत जरूरी है। यह बात रविवार को प्रातः भवानी निकेतन परिसर सीकर रोड में आयोजित नया दृष्टिकोण वाले शिविर में सन टू ह्यूमन के प्रमुख परमालय जी ने कहीं। शिविर के अंतिम दिन परमालयजी ने मंच से परिसर में मौजूद हजारों लोगों को अनुशासन का पाठ पढ़ाया और अनुशासन को जीवन में अपनाएं और घर, परिवार, समाज में अच्छा संदेश दे यह बात जोर देते हुए कहीं।

इस मौके पर संजय महेश्वरी अजय मित्तल, कमल सोमानी नरेंद्र वेद आलोक तिजारिया राजेश नागपाल बिल्ला प्रणामी राजेश नागपाल, ने भी परमालय जी का साफा और शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया।
शिविर के आयोजन में मुख्य सहयोगी कोगटा फाउंडेशन के राधा किशन कोगटा एवं जीनस ग्रुप के आई सी अग्रवाल, नीमच से आए शिव, कोलकाता से आदित्य निमानी ने भी परमालय जी का साफा, दुपट्टा और माला पहना कर अभिनंदन किया। इस मौके पर उपस्थित साधकों में परमालय जी से मिलने के लिए लोगों में उत्सुकता दिखी। समय का अभाव होने के कारण उन्होंने मंच से ही सबका आभार जताया है और हर्षोल्लास व तालिया की गड़गड़ाहट के बीच विदाई ली। उपस्थित हजारों लोगों ने करतल ध्वनि से उनका स्वागत करते हुए इसी वर्ष पुन: शिविर लगाने का आग्रह किया।

जो ऊर्जा से भर दे, ऐसे विचार और भोजन जरूरी
शिविर के प्रमुख आयोजक सदस्य संजय महेश्वरी आलोक तिजारिया अजय मित्तल ने बताया
इसके बाद अपने संबोधन में परमालय जी ने बताया कि हमारा भोजन मां के दूध जैसा ही होना चाहिए। जैसे मां का दूध पौष्टिक और पचने वाला होता है वैसा ही हमारा भोजन भी ऐसा होना चाहिए जो हमारे शरीर को ऊर्जा से भर दे और शीघ्रता से हजम हो जाए।

ऐसा होना चाहिए हमारा भोजन
शिविर के मीडिया प्रभारी राजेश नागपाल ने बताया
भोजन के बारे में बताते हुए परमालयजी ने कहा कि सुबह सबसे पहले हम जो ब्रेकफास्ट करते हैं उसे ईमानदारी से करना चाहिए। सुबह का ब्रेकफास्ट एल्कलाइन होना चाहिए। क्योंकि सुबह सूरज की किरणें बहुत तेज नहीं होती और दोपहर का भोजन स्ट्रांग एसिडक होना चाहिए। दोपहर में सूर्य की किरणें सबसे ज्यादा तेज होती है और वह स्ट्रांग एसिड और स्ट्रांग एल्कलाइन को पचा सकती है। उन्होंने लार से जुड़े हुए सूत्रों को बताते हुए कहा कि जैसे दाल और चावल को साथ में नहीं खाना चाहिए, उनकी लार अलग-अलग होती है शाम को पेय पदार्थ का ही उपयोग करना चाहिए। नहीं तो फलों का उपयोग भी कर सकते हैं। फिर भी ज्यादा आवश्यकता हो तो लौकी से बने पदार्थ ले सकते हैं। क्योंकि शाम को सूर्यास्त का समय होता है और सूरज की किरणें कमजोर होती हैं। उन्होंने लार को मजबूत करने के सूत्र देते हुए कहा कि हमें दिन में सिर्फ 3 बार ही मुंह झूठा करना चाहिए। एक बार सुबह, एक बार दोपहर को और एक बार शाम को तभी हम अपनी लार को मजबूत कर पाएंगे। परम आलयजी ने बताया कि सूर्य हमारा परमपिता है और इसी से हम जीवित हैं। वही हमें ऑक्सीजन प्रदान करता है अगर वह नहीं हो तो हम भी नहीं रहेंगे। इसलिए हमें सुबह सूर्य से पहले जगना चाहिए यह अनुशासन पूर्वक करने से व्यक्ति अपने जीवन को विकसित कर सकता है।

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