लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
40 विला एक साथ लेने के मामले पर उठाए सवाल, सीबीआई या ईडी से जांच कराने की मांग
सीएमओ में कथित भ्रष्टाचार और अधिकारियों की भूमिका पर भी उठाए सवाल, आईजी सीएमओ से जुड़े पुराने विवाद को लेकर लगाए गंभीर आरोप
जयपुर। राजस्थान में शिखर जैन प्रकरण को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। विपक्ष ने इस मामले में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सीधे कटघरे में खड़ा करते हुए इसे उनके करीब तीन साल के कार्यकाल का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया है। विपक्ष का आरोप है कि एक साथ 40 विला लेने का मामला सामान्य प्रशासनिक अनियमितता नहीं, बल्कि सत्ता के संरक्षण में हुए कथित भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर पेश करता है। विपक्ष ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की जिम्मेदारी लेते हुए सीबीआई या ईडी से जांच कराने की मांग की है।
विपक्ष की ओर से तीखा हमला बोलते हुए कहा गया कि शिखर नाम ही नहीं, काम भी शिखर जैसा रहा है। एक साथ 40 विला लेने की खबर अपने आप में चौंकाने वाली है। सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी छूट किसके इशारे पर और किन परिस्थितियों में दी गई? आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में ही संबंधित छूट देने का निर्णय किया गया था। ऐसे में मुख्यमंत्री अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
तीन साल में सबसे बड़ा घोटाला होने का आरोप
विपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कार्यकाल को लगभग तीन साल होने जा रहे हैं। इन तीन वर्षों में यदि कोई बड़ा घोटाला सामने आया है तो शिखर जैन प्रकरण उनमें सबसे गंभीर है। विपक्ष का दावा है कि इस मामले में तत्कालीन कलेक्टर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन और मुख्यमंत्री कार्यालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) के तौर पर लिए गए फैसलों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
आरोप है कि अलग-अलग प्रशासनिक पदों पर रहते हुए लिए गए फैसलों में गंभीर सवाल खड़े होते हैं। विपक्ष ने इन फैसलों को कथित तौर पर सुनियोजित भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए पूछा कि जब मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े फैसलों पर ही सवाल उठ रहे हैं तो प्रदेश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि आखिर सत्ता के गलियारों में क्या चल रहा है?
सिर्फ एसीबी जांच और एपीओ से नहीं चलेगा काम
विपक्ष ने सरकार की कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि केवल एसीबी को जांच सौंप देना या संबंधित अधिकारियों को एपीओ कर देना पर्याप्त नहीं है। मामले की निष्पक्षता और गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई या ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जानी चाहिए।
विपक्ष का कहना है कि मुख्यमंत्री को खुद सामने आकर पूरे मामले में जवाब देना चाहिए। जांच ऐसी होनी चाहिए जिसमें किसी भी अधिकारी या राजनीतिक पद पर बैठे व्यक्ति को संरक्षण न मिले और दूध का दूध, पानी का पानी हो सके।
विदेश में बैठे अधिकारी दंपती को लौटकर देनी चाहिए सफाई
इस प्रकरण में संबंधित अधिकारी दंपती के विदेश में होने को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए। कहा गया कि यदि उन पर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं और मीडिया में किसी तरह का भ्रम पैदा हुआ है तो उन्हें तत्काल भारत लौटकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी। उनकी अनुपस्थिति से मामले को लेकर संदेह और सवाल और गहरे हो रहे हैं।
सीएमओ और आईजी से जुड़े पुराने विवाद पर भी लगाए आरोप
विपक्ष ने मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े एक पुराने कथित विवाद का जिक्र करते हुए आईजी सीएमओ की भूमिका और बाद में उनके उदयपुर स्थानांतरण पर भी सवाल उठाए। आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी में अधिकारियों और अन्य लोगों के बीच विवाद तथा कथित हाथापाई तक की स्थिति बनी थी। विपक्ष ने दावा किया कि इसके बाद संबंधित आईजी को उदयपुर में तैनाती दी गई।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाया कि क्या यह स्थानांतरण महज प्रशासनिक फैसला था या इसके पीछे किसी विवाद को दबाने की मंशा थी? हालांकि इन आरोपों और कथित घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि तथा आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
मुख्यमंत्री से सीधे सवाल, जवाब कब मिलेगा?
विपक्ष ने कहा कि 40 विला का मामला, अधिकारियों की भूमिका, मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक और सीएमओ से जुड़े कथित विवाद जैसे मुद्दे सरकार की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। केवल छोटे प्रशासनिक कदम उठाकर इस मामले को दबाया नहीं जा सकता।
अब निगाहें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर हैं कि वे इन आरोपों पर क्या जवाब देते हैं और क्या सरकार इस पूरे प्रकरण की जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से कराने के लिए तैयार होती है।

















































