लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
मिलेट्स के उत्पादन, पोषण महत्व और मूल्य संवर्धित उत्पादों को लेकर किसानों को दी जानकारी
नागौर। प्रदीप कुमार डागा। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन-पौष्टिक अनाज योजनान्तर्गत वर्ष 2026-27 के लिए जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन बुधवार को जिला परिषद नागौर परिसर स्थित आत्मा सभागार में किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता अतिरिक्त निदेशक कृषि (विस्तार), सीकर खंड हरीश मेहरा ने की। कार्यक्रम में जिले के 100 से अधिक प्रगतिशील किसानों एवं प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यशाला का उद्देश्य जिले में पोषक अनाजों के उत्पादन एवं उत्पादकता को बढ़ावा देना तथा मिलेट्स से तैयार मूल्य संवर्धित उत्पादों के घरेलू उपयोग को प्रोत्साहित करना रहा।
संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार), जिला परिषद नागौर रविन्द्र सिंह ने अतिथियों, अधिकारियों-कर्मचारियों और किसानों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान की प्रमुख फसलों में मिलेट्स का महत्वपूर्ण स्थान है, जिनमें बाजरा और ज्वार प्रमुख हैं। किसानों और आमजन में श्री अन्न के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा मिलेट्स से तैयार विभिन्न उत्पादों को लेकर उद्यमिता की भावना विकसित करने के उद्देश्य से कार्यशाला आयोजित की गई।
मिलेट्स के उत्पादन और विपणन की जानकारी
कृषि विज्ञान केन्द्र अठियासन की विषय विशेषज्ञ डॉ. भावना शर्मा ने मोटे अनाजों के उत्पादन, उत्पादकता और विपणन के अवसरों के बारे में किसानों को जानकारी दी। कृषि अनुसंधान उप केन्द्र गोगेलाव, नागौर के सहायक आचार्य डॉ. रोहिताश बाज्या ने बाजरा, ज्वार, रागी, कोदो, कुटकी और सांवा सहित विभिन्न मिलेट्स के पोषण महत्व एवं स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं पर प्रकाश डाला।
कृषि विज्ञान केन्द्र अठियासन के वैज्ञानिक डॉ. बुधाराम ने बताया कि राज्य की स्थानीय जलवायु बाजरा और ज्वार जैसी फसलों के लिए अनुकूल है। सहायक निदेशक कृषि (विस्तार), डेगाना शंकरराम सियाक ने बताया कि बाजरा के क्षेत्रफल और उत्पादन की दृष्टि से राजस्थान देश के प्रमुख राज्यों में शामिल है। उन्होंने मिलेट्स के उत्पादन और उपयोग की संभावनाओं की जानकारी दी।
सहायक निदेशक कृषि (विस्तार), सीकर खंड रामनिवास ढाका ने मिलेट्स को पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए इनके नियमित उपयोग तथा विभिन्न खाद्य उत्पादों में इनके इस्तेमाल की जानकारी दी।
विभिन्न खाद्य पदार्थों में मिलेट्स के उपयोग पर जोर
उप निदेशक कृषि एवं पदेन परियोजना निदेशक आत्मा डॉ. हेमराज मीना ने बाजरा और ज्वार जैसे मोटे अनाजों को नियमित आहार में शामिल करने से पोषण स्तर में सुधार की संभावनाओं पर जानकारी दी। उन्होंने संतुलित आहार में मिलेट्स की उपयोगिता तथा इनके संभावित स्वास्थ्य लाभों के बारे में बताया।
कृषि अनुसंधान अधिकारी (शस्य) श्योपलाराम जाट ने मिलेट्स से रोटी, ब्रेड, दलिया, खीच, राबड़ी, स्नैक्स और मिलेट न्यूट्री पाउडर सहित विभिन्न खाद्य एवं पेय पदार्थ तैयार करने की जानकारी दी।
कार्यशाला में कृषि विभाग के अधिकारी एवं कार्मिक सुभाष चन्द्र, संतोष, रणजीत सिंह, स्वरूपराम जाखड़, प्रभूसिंह, राजेन्द्रसिंह मेडतिया, देवेन्द्र सिंह राठौड़, नीरज सारण, रामरतन चौधरी, अन्नाराम ईनाणिया, राजेन्द्र सिंह, नवरतन दहिया, रामकिशोर जीतरवाल, मोहनसिंह, खेताराम, संजनाकुमारी, अनिता जाजड़ा और सरोज सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।





















































