लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
18,266 प्रत्याशियों की किस्मत दांव पर
590 वार्डों में होगा मुकाबला, जयपुर के 150 वार्डों में 723 प्रत्याशी मैदान में; BJP-कांग्रेस के साथ RLP, BSP और निर्दलीय भी ठोक रहे ताल
रितु मेहरा- संवाददाता-
जयपुर। राजस्थान में नगर निकाय चुनाव का दूसरा चरण अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। 11 सितंबर 2026 को प्रदेश के छह बड़े नगर निगमों—जयपुर, जोधपुर, कोटा, बीकानेर, उदयपुर और अजमेर—में मतदान होगा। छह बड़े शहरों की जनता अपने वार्ड के पार्षदों का चुनाव करेगी और इसी के साथ अगले नगर बोर्ड की तस्वीर साफ होने की शुरुआत होगी।
दूसरे चरण में कुल 590 वार्डों पर चुनावी मुकाबला है। इनमें जयपुर के 150, जोधपुर के 100, कोटा के 100, जबकि बीकानेर, उदयपुर और अजमेर के 80-80 वार्ड शामिल हैं।
18,266 प्रत्याशियों के भाग्य का होगा फैसला
दूसरे चरण में कुल 18 हजार 266 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवारों के साथ राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP), बहुजन समाज पार्टी (BSP), अन्य दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
कई वार्डों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है, तो कई जगह निर्दलीय और छोटे दलों के प्रत्याशी दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों का चुनावी गणित बिगाड़ने की स्थिति में हैं। ऐसे में कई वार्डों के नतीजे बेहद करीबी रहने की संभावना है।
जयपुर पर सबसे ज्यादा सियासी नजर
छह नगर निगमों में सबसे ज्यादा सियासी नजरें राजधानी जयपुर पर टिकी हैं। जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में 723 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।
जयपुर के कई वार्डों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर है, जबकि कुछ वार्डों में त्रिकोणीय और बहुकोणीय मुकाबले ने चुनावी तस्वीर को और पेचीदा कर दिया है। निर्दलीय उम्मीदवारों के साथ RLP और BSP जैसे दल भी कई वार्डों में प्रमुख दलों के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश में हैं।
खास तौर पर हनुमान बेनीवाल की आरएलपी की मौजूदगी कई वार्डों में बीजेपी और कांग्रेस के चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में मुकाबला सिर्फ दो प्रमुख दलों तक सीमित नहीं माना जा रहा।
11 सितंबर को वोट, 14 सितंबर को खुलेगा EVM का राज
11 सितंबर को मतदान समाप्त होने के बाद सभी प्रत्याशियों का राजनीतिक भविष्य EVM में कैद हो जाएगा। इसके बाद ईवीएम को निर्धारित स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखा जाएगा।
सबकी नजरें इसके बाद 14 सितंबर 2026 को होने वाली मतगणना पर रहेंगी। इसी दिन सामने आएगा कि 590 वार्डों में जनता ने किसे अपना प्रतिनिधि चुना और किस दल को कितनी सफलता मिली।
पार्षदों के बाद मेयर की कुर्सी पर नजर
निकाय चुनाव की सबसे बड़ी राजनीतिक लड़ाई सिर्फ पार्षद की कुर्सी तक सीमित नहीं है। चुनाव परिणाम आने के बाद असली सियासी गणित नगर बोर्ड के गठन और मेयर की कुर्सी को लेकर शुरू होगा।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 21 सितंबर को मेयर पद और 22 सितंबर को डिप्टी मेयर पद के लिए चुनाव होगा। ऐसे में 11 सितंबर का मतदान और 14 सितंबर के नतीजे आगे होने वाले मेयर चुनाव की दिशा भी तय करेंगे।
यानी राजनीतिक दलों के लिए हर वार्ड का एक-एक पार्षद महत्वपूर्ण होगा। बहुमत से दूर रहने की स्थिति में निर्दलीय और छोटे दलों के विजयी पार्षद भी बोर्ड गठन में किंगमेकर की भूमिका में आ सकते हैं।
एक नजर में राजस्थान निकाय चुनाव का दूसरा चरण
- मतदान: 11 सितंबर 2026
- नगर निगम: 6
- शहर: जयपुर, जोधपुर, कोटा, बीकानेर, उदयपुर और अजमेर
- कुल वार्ड: 590
- कुल प्रत्याशी: 18,266
- जयपुर के वार्ड: 150
- जयपुर में प्रत्याशी: 723
- मतगणना: 14 सितंबर 2026
- मेयर चुनाव: 21 सितंबर 2026
- डिप्टी मेयर चुनाव: 22 सितंबर 2026
अब नजर EVM पर
राजस्थान के छह बड़े शहरों में 11 सितंबर को होने वाला मतदान सिर्फ पार्षद चुनने की प्रक्रिया नहीं है। इसके नतीजे आने वाले दिनों में नगर बोर्ड की सत्ता, मेयर की कुर्सी और स्थानीय राजनीति के समीकरण तय करेंगे। बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर के बीच RLP, BSP, अन्य दलों और निर्दलीयों की भूमिका भी कई वार्डों में निर्णायक हो सकती है। अब फैसला जनता के हाथ में है और 14 सितंबर को EVM खुलने के साथ साफ होगा कि शहर की सियासत की कमान किसके हाथ जाएगी।












































