लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
हैदराबाद। त्रयनगर स्थित श्री जैन श्वेताम्बर जिनकुशलसूरिजी दादाजी बाग मंदिर, कारवान दादावाड़ी में आयोजित श्री संघ शास्ता वर्षावास-2026 के अंतर्गत मंगलवार को परम पूज्य गुरुदेव सूरि सम्राट, राष्ट्ररत्न, अवंती तीर्थोद्धारक, गुणायाजी तीर्थ जीर्णोद्धार प्रेरक एवं खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. ने अपने चातुर्मासिक मंगल प्रवचन में सकारात्मक सोच और जीवन दृष्टि के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन परिस्थितियों से नहीं, बल्कि उसके दृष्टिकोण से बनता और बिगड़ता है। सुख-दुःख, लाभ-हानि और मान-अपमान जीवन का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन जो व्यक्ति अपनी सोच बदल लेता है, वह हर कठिनाई को अवसर में बदल सकता है।
आचार्य श्री ने कहा कि बाहरी सौंदर्य क्षणभंगुर होता है, जबकि श्रेष्ठ विचार ही जीवन का वास्तविक श्रृंगार हैं। मनुष्य जैसा सोचता है, वैसा ही उसका चरित्र और भविष्य बनता है। उन्होंने कहा कि जीवन के उतार-चढ़ाव ही उसकी जीवंतता का प्रमाण हैं। जिस प्रकार ईसीजी की ऊपर-नीचे होती रेखाएं जीवन का संकेत देती हैं, उसी प्रकार संघर्ष व्यक्ति के विकास का माध्यम बनते हैं।
उन्होंने जल का उदाहरण देते हुए कहा कि पानी चाहे स्वर्ण पात्र में हो या मिट्टी के घड़े में, वह अपना स्वभाव नहीं बदलता। उसी प्रकार मनुष्य को भी परिस्थितियां कैसी भी हों, अपने संस्कार, संतुलन और मूल्यों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
प्रवचन के दौरान आचार्य श्री ने महान वैज्ञानिक थॉमस एडिसन की माता का प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि सकारात्मक दृष्टिकोण एक साधारण बालक को भी महान व्यक्तित्व बना सकता है। वहीं पूनिया श्रावक और मम्मण सेठ के उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तविक समृद्धि धन-संपत्ति में नहीं, बल्कि संतोष, शांति और सकारात्मक चेतना में निहित होती है।
अपने प्रवचन के समापन में उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य परिस्थितियों को बदलने के बजाय अपनी सोच बदल ले, तो शिकायत अवसर में, कठिनाई साधना में और जीवन आनंद में परिवर्तित हो सकता है। उन्होंने कहा, “परिस्थितियां हमें नहीं तोड़तीं, हमारा दृष्टिकोण हमें तोड़ता है। नजरिया बदलो, जीवन बदल जाएगा।”
गुरुदेव श्री के प्रेरणादायी प्रवचन से उपस्थित श्रद्धालुओं ने सकारात्मक सोच अपनाने, संघर्षों का साहसपूर्वक सामना करने तथा जीवन में आत्मविश्वास, संतुलन और संतोष बनाए रखने का संकल्प लिया।


















































