लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
एआई तकनीक, हैंड हेल्ड एक्स-रे और नाट मशीनों के नेटवर्क से गांव-गांव पहुंच रही जांच सुविधा
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान टीबी उन्मूलन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), माइक्रोबायोलॉजिकल जांच नेटवर्क और जनभागीदारी आधारित अभियान के माध्यम से टीबी नियंत्रण को मिशन मोड में आगे बढ़ाया है। इससे प्रदेश में टीबी की शीघ्र पहचान, गुणवत्तापूर्ण जांच और समय पर उपचार सुनिश्चित हो रहा है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि “टीबी मुक्त राजस्थान केवल स्वास्थ्य विभाग का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जन-जन के सहयोग से चलने वाला जनआंदोलन है। आधुनिक तकनीक, मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था और व्यापक जनभागीदारी के बल पर राजस्थान जल्द ही टीबी मुक्त राज्य बनेगा।”
137 हैंड हेल्ड एक्स-रे और 643 नाट मशीनों का नेटवर्क
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि प्रदेशभर में 137 हैंड हेल्ड डिजिटल एक्स-रे मशीनों के माध्यम से ग्राम पंचायतों और प्राथमिक स्वास्थ्य संस्थानों तक विशेष स्क्रीनिंग शिविर लगाए जा रहे हैं। इन पोर्टेबल मशीनों से दूर-दराज के क्षेत्रों में भी मौके पर ही चेस्ट एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध हो रही है।
इसके साथ ही राज्य में 643 नाट (NAAT) मशीनों का नेटवर्क विकसित किया गया है, जिससे संदिग्ध मरीजों की त्वरित और उच्च गुणवत्ता वाली जांच संभव हो रही है। इससे टीबी की शीघ्र पुष्टि के साथ ड्रग रेजिस्टेंट टीबी की पहचान भी तेजी से हो रही है।
टीबी नियंत्रण में एआई तकनीक का उपयोग
राज्य सरकार ने टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तीन प्रमुख तकनीकों को शामिल किया है—
- कफ अगेंस्ट टीबी – खांसी की आवाज और लक्षणों के आधार पर संभावित टीबी की प्रारंभिक पहचान।
- प्रेडिक्शन ऑफ एडवर्स टीबी आउटकम्स – जटिलताओं की आशंका वाले मरीजों की पहले से पहचान कर विशेष चिकित्सकीय देखभाल सुनिश्चित करना।
- वल्नरेबिलिटी मैपिंग फॉर टीबी – निक्षय पोर्टल और अन्य सामाजिक-स्वास्थ्य संकेतकों के आधार पर टीबी प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर सक्रिय रोगी खोज अभियान को अधिक प्रभावी बनाना।
85 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग
14 जुलाई से चल रहे विशेष सक्रिय क्षय रोग खोज अभियान के तहत अब तक 85 लाख से अधिक लोगों की घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की जा चुकी है। उच्च जोखिम वाले समूहों को प्राथमिकता देकर जांच और उपचार से जोड़ा जा रहा है।
वहीं, 24 मार्च से 27 जुलाई तक चले टीबी मुक्त भारत 100 दिवसीय अभियान के दौरान—
- 38.23 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की गई।
- 34.37 लाख चेस्ट एक्स-रे किए गए।
- 2.79 लाख नाट जांचें हुईं।
- 58,358 नए टीबी मरीजों की पहचान की गई।
- इनमें 15,302 ऐसे मरीज मिले, जिनमें टीबी के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं थे।
6547 ग्राम पंचायतें हुईं टीबी मुक्त
टीबी उन्मूलन अभियान में जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए विद्यालयों, महाविद्यालयों, माय भारत स्वयंसेवकों, निक्षय मित्रों, जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संस्थाओं को जोड़ा गया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2025 में प्रदेश की 6,547 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त घोषित की जा चुकी हैं।
भारत सरकार ने भी कार्यक्रम की प्रभावी निगरानी और समन्वय के लिए राजस्थान के लिए संयुक्त सचिव स्तर के राज्य प्रभारी अधिकारी की नियुक्ति की है।
जनकल्याणकारी अभियानों से बढ़ी जागरूकता
राज्य सरकार के पंडित दीनदयाल उपाध्याय शिविर, स्वस्थ नारी-सशक्त परिवार अभियान तथा शहरी एवं ग्रामीण सेवा शिविरों के माध्यम से टीबी के प्रति जागरूकता अभियान को व्यापक रूप से आगे बढ़ाया गया है। इन कार्यक्रमों के जरिए लोगों को टीबी के लक्षण, समय पर जांच और उपचार के महत्व की जानकारी दी जा रही है तथा सामाजिक कलंक को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
निक्षय मित्र अभियान के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी भी बढ़ी है। बड़ी संख्या में निक्षय मित्र टीबी मरीजों को पोषण किट उपलब्ध कराकर उनके उपचार में सहयोग कर रहे हैं। राज्य सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक, समयबद्ध उपचार और जनसहभागिता के समन्वित प्रयासों से राजस्थान टीबी मुक्त राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।


















































