लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली | (रितु मेहरा)
विश्व बैंक (World Bank) ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक अनुमान जारी करते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी (GDP) वृद्धि दर का अनुमान 6.3% से बढ़ाकर 6.6% कर दिया है। संस्था का कहना है कि मजबूत घरेलू मांग (Domestic Demand), बढ़ता निवेश और मुक्त व्यापार समझौतों (Free Trade Agreements) से भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
घरेलू मांग बनी सबसे बड़ी ताकत
विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में उपभोक्ताओं का खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे (Infrastructure) में किए जा रहे निवेश और निजी क्षेत्र की गतिविधियों में तेजी से आर्थिक विकास को गति मिली है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सेवा क्षेत्र, विनिर्माण (Manufacturing) और डिजिटल अर्थव्यवस्था भारत की विकास दर को मजबूत बनाए हुए हैं।
मुक्त व्यापार समझौतों से मिलेगा लाभ
विश्व बैंक का मानना है कि भारत के नए Free Trade Agreements (FTA) से निर्यात बढ़ेगा और विदेशी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
दक्षिण एशिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत आने वाले वर्षों में भी दक्षिण एशिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। मजबूत आर्थिक नीतियां, डिजिटल परिवर्तन, बुनियादी ढांचे का विकास और घरेलू मांग भारत की वृद्धि को समर्थन देंगे।
चुनौतियां भी बरकरार
हालांकि विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता भारत की विकास दर पर दबाव डाल सकती हैं। यदि ऊर्जा की कीमतें बढ़ती हैं तो महंगाई और उत्पादन लागत में भी वृद्धि हो सकती है।
प्रमुख बातें
- GDP वृद्धि अनुमान: 6.3% से बढ़ाकर 6.6%
- मजबूत घरेलू मांग और निवेश से मिला समर्थन।
- मुक्त व्यापार समझौतों से निर्यात और विदेशी निवेश बढ़ने की उम्मीद।
- भारत दक्षिण एशिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
- वैश्विक तनाव और तेल की कीमतें अभी भी प्रमुख जोखिम हैं।



















































