वंशिका को न्याय दिलाने की मांग तेज, परिवार ने उठाए पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

— 48 घंटे का अल्टीमेटम, प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो भाजपा प्रदेश मुख्यालय पर होगा धरना

जयपुर। प्रताप नगर क्षेत्र से 5 जून को लापता हुई तथा 6 जून को मृत अवस्था में मिली 15 वर्षीय वंशिका गर्ग की हत्या के मामले में गुरुवार को पिंकसिटी प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता आयोजित की गई। पत्रकार वार्ता में वंशिका के पिता मनीष गर्ग, माता संतोष गर्ग, भाई वरुण गर्ग, एडवोकेट पीयूष अग्रवाल, आशीष अग्रवाल, मोहित गौतम, संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल, प्रदेश प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी अभिषेक जैन ‘बिट्टू’ सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

पत्रकार वार्ता में परिजनों ने आरोप लगाया कि वंशिका हत्याकांड की जांच को जानबूझकर धीमा किया जा रहा है, आरोपियों को बचाने का प्रयास हो रहा है तथा महत्वपूर्ण साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका है। परिवार ने कहा कि घटना के समय न्याय का भरोसा देने वाले कई जनप्रतिनिधि आज फोन तक नहीं उठा रहे हैं। घटना को एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद न तो जांच की वास्तविक स्थिति बताई जा रही है और न ही हत्या के कारणों का खुलासा किया गया है।
परिजनों ने प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि इस अवधि में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और जांच की संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई, तो परिवार अपने शुभचिंतकों के साथ भाजपा प्रदेश मुख्यालय पर लोकतांत्रिक तरीके से धरना देगा। इसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

जन्मदिन पर भावुक हुआ परिवार, कहा- हमारी बेटी आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रही है

गुरुवार को वंशिका के जन्मदिन पर परिवार ने भावुक अपील करते हुए कहा कि हर बेटी का सपना होता है कि वह अपना जन्मदिन अपने परिवार और अपनों के साथ खुशियों में मनाए, लेकिन उनकी बेटी आज इस दुनिया में नहीं है। परिवार ने कहा कि उनकी बेटी की आत्मा आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रही है और पूछ रही है कि आखिर उससे जीने का अधिकार क्यों छीन लिया गया। परिवार ने संकल्प दोहराया कि वंशिका को न्याय मिलने तक उनका संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।

पुलिस ने पीड़ित परिवार के मोबाइल जब्त किए, लेकिन आरोपियों पर कार्रवाई नहीं

वंशिका के पिता मनीष गर्ग ने कहा कि पुलिस ने जांच के नाम पर पीड़ित परिवार के मोबाइल फोन एक माह पहले जब्त कर लिए, लेकिन आज तक यह नहीं बताया गया कि उनसे क्या साक्ष्य मिले। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर पीड़ित परिवार के मोबाइल ही क्यों जब्त किए गए, जबकि आरोपियों के मोबाइल जब्त कर उनकी गिरफ्तारी और साक्ष्य जुटाने की दिशा में कार्रवाई होनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों के दबाव में पुलिस पीड़ित परिवार को परेशान कर रही है और वास्तविक आरोपियों को संरक्षण दिया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि आरयूएचएस अस्पताल के बाहर चल रहे धरने के दौरान पुलिस और प्रशासन ने दो दिन में कार्रवाई कर आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया था। धरने के दौरान लोगों को बिना सूचना के डिटेन किया गया और डराने-धमकाने का प्रयास भी किया गया, लेकिन एक माह बाद भी न कोई गिरफ्तारी हुई और न ही जांच की स्थिति स्पष्ट की गई।

मनीष गर्ग ने कहा कि धरने के दौरान विधायक कैलाश वर्मा, भाजपा ब्लॉक अध्यक्ष गोपाल सैनी सहित कई जनप्रतिनिधियों ने परिवार से धरना समाप्त कर अंतिम संस्कार करने का आग्रह करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुलाकात कराने और शीघ्र न्याय दिलाने का भरोसा दिया था, लेकिन आज वही जनप्रतिनिधि फोन तक नहीं उठा रहे हैं।

एफएसएल रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी उठाए सवाल

वंशिका की माता संतोष गर्ग ने आरोप लगाया कि एफएसएल रिपोर्ट को लेकर लगातार भ्रम की स्थिति बनाई जा रही है। उन्होंने बताया कि 4 जुलाई को वे पुलिस अधिकारियों से रिपोर्ट की जानकारी लेने पहुंचे, लेकिन उन्हें न तो कोई जानकारी दी गई और न ही अधिकारियों से मिलने दिया गया।

उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के दौरान भी चिकित्सकों ने विस्तृत जानकारी देने में असमर्थता जताई। परिवार का कहना है कि पूरे मामले में पारदर्शिता बनाए रखना जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी है। समाज को एकजुट होकर बेटियों की सुरक्षा के लिए आगे आना होगा

संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने कहा कि यह संघर्ष किसी राजनीतिक दल या व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि एक बेटी के माध्यम से देश की करोड़ों बेटियों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए लड़ा जा रहा है।

संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने सभी अभिभावकों और समाज के लोगों से इस न्याय की लड़ाई में साथ आने की अपील करते हुए कहा कि आज लगातार बेटियों के साथ हो रही घटनाएं कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अभिभावक पूछ रहा है कि यदि बेटियां घर, स्कूल, सड़क और न्याय व्यवस्था—कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं, तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। बेटियों की सुरक्षा केवल सरकार या प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि प्रशासन केवल लीपापोती करता रहा तो समाज का कानून व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होगा।

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