लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
गांवों में आज भी कायम है अनोखी परंपरा
गंगधार, झालावाड़ | सुनील निगम, लोक टुडे
आधुनिक दौर में मौसम का पूर्वानुमान लगाने का काम भले ही मौसम विभाग करता हो, लेकिन ग्रामीण अंचलों में आज भी प्रकृति के संकेतों के आधार पर मानसून का अनुमान लगाया जाता है। ऐसी ही एक अनोखी परंपरा टिटहरी पक्षी से जुड़ी हुई है, जिसे गंगधार उपखंड क्षेत्र में “टिटोडी” के नाम से जाना जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि इस पक्षी के अंडों की संख्या और स्थान देखकर बारिश का अंदाजा लगाया जा सकता है।
लाल चोंच और धूसर-भूरे रंग वाली टिटहरी (Red Wattled Lapwing) अपनी कर्कश आवाज और जमीन पर अंडे देने की आदत के लिए जानी जाती है। यह पक्षी मानसून आने से पहले अंडे देता है और आमतौर पर सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों का चयन करता है।
अंडों से ऐसे लगाया जाता है बारिश का अनुमान
ग्रामीण बुजुर्गों के अनुसार, टिटहरी के अंडों के आधार पर मानसून का पूर्वानुमान लगाने की परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है।
- यदि टिटहरी चार अंडे देती है, तो इसे चार महीने अच्छी बारिश का संकेत माना जाता है।
- अगर एक ही अंडा देती है, तो कम बारिश या छोटा मानसून माना जाता है।
- यदि पक्षी नदी या निचले क्षेत्र में अंडे दे, तो वर्ष कमजोर मानसून और सूखे की आशंका मानी जाती है।
- वहीं ऊंचे स्थान पर अंडे देना अच्छी और भरपूर बारिश का संकेत माना जाता है।
चौमहला क्षेत्र में दिखा अनोखा नजारा
हाल ही में चौमहला कस्बे की निगम कॉलोनी में टिटहरी द्वारा दिए गए अंडों को देखने ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। स्थानीय लोगों ने बताया कि अंडों के पास जाने पर पक्षी काफी आक्रामक हो जाता है और अपने अंडों की सुरक्षा करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि भले ही विज्ञान ने मौसम पूर्वानुमान के आधुनिक तरीके विकसित कर लिए हों, लेकिन गांवों में आज भी टिटहरी और प्रकृति के अन्य संकेतों पर लोगों का भरोसा कायम है।














































