80 वर्षीय वृद्धा की पुकार: “अगर इंसाफ नहीं दे सकते, तो इच्छामृत्यु दे दो”

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

80 वर्षीय वृद्धा की न्याय के लिए पुकार: “अगर इंसाफ नहीं दे सकते, तो इच्छामृत्यु दे दो”

नागौर, राजस्थान । राजस्थान के नागौर जिले के ग्राम आकेली ए की 80 वर्षीय विधवा सायरी देवी पिछले तीन वर्षों से न्याय की लड़ाई लड़ रही हैं। उम्र के इस पड़ाव पर, जहां उन्हें सहारे और सम्मान की जरूरत थी, वहीं प्रशासनिक कार्रवाई, कथित भ्रष्टाचार और राजनीतिक पक्षपात ने उनका सब कुछ छीन लिया। अब हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि सायरी देवी और उनके पुत्र पांचाराम ने सुप्रीम कोर्ट में इच्छामृत्यु की मांग तक कर दी है।

तीन साल से न्याय की तलाश

सायरी देवी का आरोप है कि 16 मार्च 2022 को तत्कालीन तहसीलदार भागीरथ चौधरी ने बिना नोटिस, बिना सीमाज्ञान और बिना सुनवाई के उनकी खातेदारी जमीन पर बुलडोजर चलवा दिया। कार्रवाई के दौरान उनकी 500 फीट लंबी पाल तोड़ दी गई, 3 बीघा में खड़ी जीरे की फसल बर्बाद कर दी गई और वर्षों की मेहनत से जुटाया गया सामान जब्त कर लिया गया।

परिवार का कहना है कि लोहे का दरवाजा, 20 ट्रॉली पत्थर, 40 क्विंटल चारा, कृषि औजार, लोहे की चादरें और पशुओं की नांद तक उठा ली गई। इतना ही नहीं, हरे-भरे खेजड़ी के पेड़ों को भी उखाड़ दिया गया।

प्रशासनिक कार्रवाई पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब 22 अगस्त 2023 को संभागीय आयुक्त अजमेर ने इस कार्रवाई को त्रुटिपूर्ण और गैरकानूनी मानते हुए निरस्त कर दिया। इसके बावजूद आज तक न तो जब्त सामान लौटाया गया और न ही नुकसान का कोई मुआवजा मिला।

उपखंड अधिकारी मेड़ता के पत्र में भी स्वीकार किया गया कि सीमाज्ञान नहीं हुआ था और बिना नोटिस कार्रवाई की गई। बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

“गांव में सिर्फ हमें ही निशाना बनाया गया”

सायरी देवी का आरोप है कि गांव में कई अन्य जगहों पर अतिक्रमण होने के बावजूद केवल उनके परिवार को ही निशाना बनाया गया। परिवार का कहना है कि यह सब राजनीतिक रंजिश और प्रशासनिक मिलीभगत का नतीजा है।

तीन साल में उन्होंने मुख्यमंत्री जनसुनवाई, कलेक्ट्रेट, विधायक, सांसद और मंत्रियों तक गुहार लगाई। अखबारों और न्यूज़ चैनलों में खबरें भी प्रकाशित हुईं, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला।

16 लाख का कर्ज, टूटी खेती और बिखरता परिवार

खेती उजड़ने के बाद परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट चुका है। जयपुर थार ग्रामीण बैंक से लिया गया 16 लाख रुपये का कर्ज अब चुकाना मुश्किल हो गया है। परिवार का आरोप है कि उन्हें सरकारी योजनाओं से भी वंचित रखा गया।

80 वर्षीय सायरी देवी कहती हैं—

“इस उम्र में हमने सब कुछ खो दिया। जमीन गई, फसल गई, सम्मान भी चला गया। अगर सुप्रीम कोर्ट भी न्याय नहीं दे सकता, तो हमें इच्छामृत्यु दे दी जाए।”

अब सुप्रीम कोर्ट में अंतिम उम्मीद

सायरी देवी और पांचाराम ने अब सुप्रीम Court में जनहित याचिका दायर कर निष्पक्ष जांच, मुआवजा, जब्त सामान की वापसी और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की भी अपील की है।

यह मामला केवल एक परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में प्रशासनिक जवाबदेही और किसानों की पीड़ा पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

मीडिया और समाज से अपील

सायरी देवी का परिवार चाहता है कि उनकी आवाज देशभर तक पहुंचे ताकि उन्हें न्याय मिल सके और भविष्य में किसी अन्य किसान परिवार को ऐसी त्रासदी न झेलनी पड़े।

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