मरुधरा का जल-संकट समाधान: नहरबंदी के बाद मुख्य जलाशयों में वाटर इनफ्लो शुरू

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

आगामी 48 घंटों में शहरी जल आपूर्ति सामान्य होने की संभावना

राजस्थान | विशेष क्षेत्रीय रिपोर्ट | नितिन मेहरा, वरिष्ठ संवाददाता

पश्चिमी राजस्थान में पिछले कई हफ्तों से जारी नहरबंदी (कैनाल क्लोजर) के कारण बने जल संकट के बाद अब राहत के संकेत मिलने लगे हैं। पश्चिमी राजस्थान में मुख्य जल स्रोतों से पानी का प्रवाह पुनः शुरू हो गया है और प्रमुख जलाशयों में वाटर-इनफ्लो तेज हो गया है।

मुख्य जलाशयों में बढ़ा जल स्तर

पंजाब क्षेत्र से छोड़ा गया अतिरिक्त पानी रेगुलेटर सिस्टम को पार करते हुए मरुस्थलीय जिलों के स्टोरेज प्वॉइंट्स तक पहुंचने लगा है। इसके बाद शहरी जल आपूर्ति पर बने संकट में राहत की स्थिति बनती दिखाई दे रही है।

जोधपुर बेसिन में सुधार के संकेत

कायलाना-तख्तसागर बेसिन में जल स्तर निचले स्तर तक पहुंच गया था, लेकिन अब नए जल प्रवाह के कारण इनटेक वेल्स तक पानी पहुंचने की प्रक्रिया तेज हो गई है। तकनीकी टीम के अनुसार अगले 48 घंटों में जल दबाव सामान्य हो जाएगा और शहरी आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद है।

बीकानेर और हनुमानगढ़ क्षेत्र में स्थिति बेहतर

हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर क्षेत्रों में सबसे पहले राहत देखी गई थी, जिसके बाद अब बीकानेर संभाग में भी हेडवर्क्स तक लगातार पानी पहुंच रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों की जल डिग्गियों को प्राथमिकता के आधार पर रीचार्ज किया जा रहा है, जिससे दूरस्थ ढाणियों तक राहत पहुंच सके।

सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिरता

जैसलमेर-बाड़मेर लिफ्ट नेटवर्क में पहले से किए गए जल प्रबंधन के कारण नहरबंदी के दौरान भी बड़ी समस्या नहीं हुई। अब मुख्य कैनाल के बहाव के साथ लिफ्ट परियोजनाओं को अतिरिक्त जल आपूर्ति मिल रही है।

वर्तमान प्रवाह और आगे की स्थिति

जल संसाधन विभाग की मॉनिटरिंग के अनुसार फिलहाल लगभग 7,000 क्यूसेक से अधिक पानी का प्रवाह मुख्य कैनाल में जारी है। यह पानी पूरी तरह पेयजल आपूर्ति के लिए आरक्षित है। कृषि सिंचाई के लिए नहर खोलने में अभी दो से तीन सप्ताह का समय लग सकता है।

अधिकारियों के अनुसार यदि प्रवाह इसी तरह बना रहा तो आगामी दो दिनों में शहरी जल आपूर्ति प्रणाली पूरी तरह सामान्य हो जाएगी और गर्मी के बीच लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

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