लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर। भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार जनजातीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। बजट वर्ष 2026-27 में जनजाति समाज के उत्थान, आर्थिक सशक्तीकरण और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई बड़ी घोषणाएं की गई हैं।
वनाधिकार पट्टों के लिए विशेष अभियान
राज्य सरकार द्वारा जनजातीय परिवारों को व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वनाधिकार पट्टे जारी करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इन पट्टों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा, जिससे किसानों को सरकारी योजनाओं—जैसे पीएम किसान सम्मान निधि—का सीधा लाभ मिलेगा और बैंक ऋण प्राप्त करना आसान होगा।
ग्रामदानी गांवों को मिलेगा खातेदारी अधिकार
डूंगरपुर और बांसवाड़ा के ग्रामदानी अधिनियम से शासित गांवों के किसानों को अब खातेदारी अधिकार देने की दिशा में संशोधन किया जाएगा। इससे वे सरकारी योजनाओं और बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।
कृषि और किसानों की आय पर फोकस
जनजातीय क्षेत्रों में कृषि को लाभप्रद बनाने के लिए कांगनी, कोदो, सांवा, कुटकी, चीना और रागी जैसे मिलेट्स की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। 100 हेक्टेयर में प्रदर्शनियां लगाकर किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके अलावा 8.5 लाख किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए 85 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
महिला सशक्तीकरण और बालिका शिक्षा
सहरिया, खैरवा और कथौड़ी जनजाति परिवारों की महिला मुखिया को अब खाद्य सामग्री के स्थान पर सीधे 1200 रुपये प्रतिमाह बैंक खाते में दिए जाएंगे। इस योजना से करीब 38 हजार परिवार लाभान्वित होंगे।
साथ ही सिरोही जिले में जनजातीय बालिकाओं के लिए नया छात्रावास खोला जाएगा, जिससे शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार
युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत 5 हजार युवाओं को ब्याजमुक्त ऋण दिया जाएगा। इसके अलावा बांसवाड़ा और उदयपुर में वन उपज आधारित प्रसंस्करण केंद्र स्थापित कर रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएंगे।
आधारभूत ढांचा और आस्था स्थल विकास
जनजातीय क्षेत्रों में सड़कों, पुलियाओं और अन्य आधारभूत ढांचे को मजबूत किया जाएगा। साथ ही सलूम्बर, बांसवाड़ा और उदयपुर के प्रमुख धार्मिक स्थलों का भी विकास किया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य जनजातीय समाज को मुख्यधारा से जोड़ते हुए उन्हें आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से सशक्त बनाना है, ताकि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।


















































