गहलोत बोले मंत्रिमंडल के सदस्य सीएम का कितनी ईमानदारी से देते हैं साथ?

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

जयपुर।  पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और मंत्रियों के बेटे- बेटियों, साले- सालियों और निकटवर्ती रिश्तेदारों को सरकार में हस्तक्षेप करने को सरासर गलत बताया है। गहलोत ने   मीडिया द्वारा आरसीए में विधायकों के बेटों को एडजस्ट करने के सवाल पर जवाब  देते हुए कहा कि  मैंने कहा ना आपको कि मुख्यमंत्री खुद दबाव में काम कर रहे हैं वरना ये स्थिति बनती नहीं। मुख्यमंत्री जी दबाव में काम कर रहे हैं। मंत्रीमंडल इनका बना हुआ है पता नहीं कितने मंत्री इनको ईमानदारी से साथ देते हैं, आई डोंट नो, मुझे पता नहीं। वो कब तक आप भारत सरकार के सरकार जो वहां की है उनके आप सलाह लेने का काम करते जाओगे। ये तो गलत बात है ना। ऐसा माहौल बन गया है हर काम के लिए पूछना पड़ता है दिल्ली से। ये पब्लिक में धारणा बनना भी गलत है, ये भी मैं मुख्यमंत्री जी को कन्वे करना चाहूँगा कि ये धारणा मत रखो। बार-बार पीएम से मिलते हो।आप मिलो पर आप जैसे जोधपुर गए परसों ही। जोधपुर में बड़े प्रोजेक्ट हैं, वो मुख्यमंत्री के लायक ही हैं वो मान लो। वो तो उद्घाटन कर सकते थे ये। लाइब्रेरी बड़ी है सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी। स्पोर्ट्स की इंस्टीट्यूट बन गई वहां पर, फिनटेक यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट बन रही है वहां पर ₹600 करोड़ से। बिल्डिंग बन गई हैं।
अब ये काम क्यों नहीं आगे बढ़ा रहे, वो तो मुख्यमंत्री खुद ही उद्घाटन कर सकते हैं और हम तो स्वागत करेंगे मुख्यमंत्री जी का। इतने ये क्या कहना चाहिए तानाशाह प्रवृत्ति के लोग हैं, इनकी सोच वही है। हम सरकार में आते हैं तो बीजेपी के एमएलए, एमपी को बुलाते हैं। पत्थर पर नाम लिखवाते हैं, इनवाइट करते हैं। वसुंधरा जी हो या भजनलाल जी हो। मैं खुद मुख्यमंत्री रहा हूँ। जोधपुर मेरी कॉन्स्टिट्यूएंसी में कोई काम किए होंगे इन्होंने, मुझे आज तक बुलाया ही नहीं गया होगा। आप बताइए, इतना बड़ा अंतर सोच है कांग्रेस में और बीजेपी-आरएसएस के अंदर। कोई जवाब दे सकते हैं ये लोग हमें? बुलाते ही नहीं है, कमाल है भाई। अभी भी हो रहा है। पंचायत चुनाव के इंतजार पर
सवाल का जवाब: अब देखिए पंचायत चुनाव हमारे वक्त में स्ट्राइक हो गई थी कर्मचारियों की, तो हमने भी रिक्वेस्ट की थी कोर्ट से, स्ट्राइक में चुनाव कैसे करवाएंगे। तो फैसला हमारे खिलाफ आ गया कि नहीं चुनाव तो आपको संविधान में जो है उसको आपको ध्यान में रखकर करवाना ही पड़ेगा। हमें उस स्ट्राइक के अंदर आपस में और लोगों को ऑर्गेनाइज करके, जो चुनाव में भाग नहीं लेते उनको रिक्वेस्ट करके सबको साथ लेकर हमने चुनाव करवाया, हम कामयाब भी हो गए उसमें। ये बहानेबाजी कर रहे हैं। आज वो मेरे ख्याल से पत्रिका में आया है फ्रंट पेज पे न्यूज आई है। मिस्टर सिसोदिया कोई हैं, शायद उनका ही वो आर्टिकल होगा अंदाज है मुझे याद है शायद कोई होगा। इतना अच्छा विश्लेषण उसने किया है पूरे चुनाव का। कैसे इलेक्शन, जो ये चुनाव आयोग है। कैसे कोर्ट ऑफ कंडक्ट से, कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट से बचने के लिए वो बार-बार सरकार लिख रहा है कि भाई मैं बच जाऊं कम से कम सरकार पे आए। सरकार ,सरकार ही होती है, वो तो राइट लेफ्ट करती रहती है। चुनाव टालने के लिए रात दिन एक किए हुए हैं। ओबीसी का टर्म खत्म हो रहा है कल और क्यों नहीं आपने ली अभी पहले रिपोर्ट? क्यों नहीं ली आपने रिपोर्ट? ये जान बूझकर इतने लगता है इनके खिलाफ इतना माहौल बन चुका है राजस्थान के अंदर, मुख्यमंत्री खुद के खिलाफ भी, सरकार के खिलाफ भी। उससे बचने के लिए मैं समझता हूँ ये तरीके निकाल रहे हैं जो कि संविधान की भावना के खिलाफ है। कैसे मुख्यमंत्री रह पाएंगे ये अगर चुनाव नहीं करवा पाएंगे तो क्या होगा बताओ? संविधान का क्या होगा? ये बात तो दिल्ली के जो केंद्रीय नेता हैं , प्रधानमंत्री जी हैं, अमित शाह जी हैं और जो इनके नेता हैं, उनके सोचने की बात है ये कि राजस्थान गवर्नमेंट चुनाव क्यों नहीं करवा पा रही है। ये संविधान की मूल भावना का उल्लंघन कर रही है। इस पर विचार करना चाहिए उनको पर ये मेनिपुलेट कर रहे हैं लोग।
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