23 मार्च शहीद दिवस हमारे लिए सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि बलिदान, साहस और देशभक्ति का प्रतीक

0
53
- Advertisement -

लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

योगेश ऋषिका

सीकर। शहीद दिवस के अवसर पर शहीद-ए-आजम विचारधारा मंच द्वारा वीर सपूतों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान वक्ताओं ने शहीदों के बलिदान को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

मंच के संस्थापक हरिराम मील ने कहा कि 23 मार्च का दिन भारतीय इतिहास का एक गौरवपूर्ण दिन है, जब शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने हंसते-हंसते देश की आजादी के लिए फांसी का फंदा चूम लिया था। उन्होंने बताया कि वर्ष 1931 में ब्रिटिश सरकार ने औपनिवेशिक शासन के खिलाफ उनके संघर्ष के कारण उन्हें फांसी दी थी।

उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि लाहौर षड्यंत्र मामले में उस समय के न्यायाधीश सैयद आगा हैदर ने इन क्रांतिकारियों को फांसी की सजा सुनाने से इनकार कर दिया था और नैतिक आधार पर अपना इस्तीफा देते हुए कहा था कि “वह जज हैं, कसाई नहीं।” बाद में ब्रिटिश सरकार ने नया ट्रिब्यूनल बनाकर सजा सुनाई।

मंच अध्यक्ष सुनील चौधरी एवं गजेंद्र धीवा ने कहा कि शहीद दिवस हमारे लिए केवल एक तिथि नहीं, बल्कि बलिदान, साहस और देशभक्ति का प्रतीक है। इन महान क्रांतिकारियों का त्याग आज भी हर भारतीय के हृदय में देशभक्ति की प्रेरणा जगाता है।

उन्होंने कहा कि हमें शहीदों के बलिदान को याद करते हुए देश के प्रति अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करने का संकल्प लेना चाहिए।

इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में हरिराम मील, सुनील चौधरी, गजेंद्र धीवा, प्रशांत चौधरी, योगेश, मनोज, चिराग, गौतम, मोहित, अमित, विक्रम एवं पवन सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here