लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
450 बच्चों की पढ़ाई खुले आसमान तले, सरकार सोई!
बनेड़ा । बनेड़ा उपखंड के खातनखेड़ी (डाइस कोड: 08240401001) स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले 450 मासूम बच्चों का भविष्य खुले चौक में बैठकर लिखा जा रहा है, जबकि सरकार और शिक्षा विभाग फाइलों के सहारे शिक्षा सुधार का ढिंढोरा पीट रहे हैं।
स्कूल क्रमोन्नत ,लेकिन भवन बनाना भूली सरकार
विद्यालय को 2021 और 2022 में क्रमोन्नत कर सीनियर सेकेंडरी का दर्जा दे दिया गया, लेकिन भवन देना शायद भूल गए। हकीकत यह है कि पूरे विद्यालय में मात्र 5 जर्जर कमरे हैं, जिनमें से दो कमरों की छतें टूटी हुई, लोहे के पाइप लगाकर किसी तरह हादसे को टाला जा रहा है। सवाल यह है कि अगर कोई हादसा हो गया तो ज़िम्मेदार कौन होगा?
छात्र संख्या के अनुपात में कक्षाओं की भारी कमी
छात्र संख्या के अनुपात में कक्षाओं की भारी कमी के कारण कई कक्षाओं को खुले चौक में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है, जहाँ न धूप से बचाव है, न बारिश से और न ही बच्चों की सुरक्षा की कोई गारंटी। क्या यही है सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता?
जमीन आवंटित, फिर भी निर्माण शून्य
आरटीआई एक्टिविस्ट एवं सामाजिक कार्यकर्ता मुबारक मंसूरी (उपरेडा) के अनुसार, जनवरी 2024 में तत्कालीन जिला कलेक्टर शाहपुरा द्वारा विद्यालय भवन निर्माण के लिए उपरेडा रोड पर 11 बीघा 3 बीघा भूमि आवंटित की जा चुकी है।
दो साल बीत गए, एक ईंट तक नहीं लगी
जनसुनवाई 181, संपर्क पोर्टल, डीएमएफटी योजना, शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन, मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक सैकड़ों पत्राचार हो चुके हैं, लेकिन नतीजा वही —
क्या किसी हादसे का इंतज़ार है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा?क्या बच्चों की जान की कीमत पर ही बजट और स्वीकृति मिलती है? ग्रामीणों और अभिभावकों की एक सुर में मांग है कि वित्त वर्ष 2026–27 के बजट में तत्काल विद्यालय भवन निर्माण का प्रस्ताव शामिल कर विधानसभा से अनुमोदन कराया जाए, अन्यथा आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।
शिक्षा का अधिकार या सिर्फ काग़ज़ी दावा?
सरकार एक ओर शिक्षा के अधिकार की बात करती है, दूसरी ओर 450 बच्चों को छत तक नहीं दे पा रही।
अब सवाल सरकार से है —
कब बनेगा खातनखेड़ी का स्कूल भवन? या फिर बच्चों का भविष्य यूँ ही खुले आसमान तले पलता रहेगा?















































