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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
इंसानियत आज भी ज़िंदा है:
मारोठ। जब सड़क दुर्घटनाओं के बाद लोग वीडियो बनाने, तमाशा देखने या सरकारी गाड़ी का इंतज़ार करने में समय गंवा देते हैं, ऐसे दौर में इंसानियत की मिसाल पेश की है मारोठ के समाजसेवी एवं पत्रकार हितेश जैन रारा ने।
रविवार देर रात मारोठ कस्बे के बीच व महाराजपुरा के पास दो मोटरसाइकिलों की आपस में भिड़ंत हो गई। हादसे में दोनों बाइक सवार गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर खून से लथपथ पड़े रहे। दुर्घटना स्थल पर दर्जनों वाहन रुके, कई लोग खड़े होकर देखते रहे, लेकिन कोई भी घायल युवकों की मदद के लिए आगे नहीं आया।
इसी दौरान नावां से मारोठ की ओर अपनी नई गाड़ी से आ रहे समाजसेवी हितेश रारा ने स्थिति देखी और बिना एक पल गंवाए कहा—
“गाड़ी इंसान से बड़ी नहीं होती।”
उन्होंने दोनों घायलों को अपनी गाड़ी में बैठाया, चाहे गाड़ी खराब हो जाए या खून से लथपथ हो जाए, और तुरंत उन्हें मारोठ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएससी) पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को गंभीर हालत में हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया।
घायलों को अस्पताल पहुंचाने के दौरान हितेश रारा की गाड़ी पूरी तरह खून से सनी हुई थी, लेकिन उनके इस मानवीय कदम ने मौके पर मौजूद हर व्यक्ति को सोचने पर मजबूर कर दिया।
हितेश रारा ने यह साबित कर दिया कि
मानवता आज भी ज़िंदा है, बस ज़रूरत है आगे बढ़ने के साहस की।
उनका यह कार्य समाज के लिए एक सशक्त संदेश है कि संकट के समय मदद करना ही सबसे बड़ा धर्म है।
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