लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
मेरठ में दिल दहला देने वाला अपराध:
मेरठ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कपासड़ा गांव में इंसानियत को झकझोर देने वाली वारदात सामने आई है। यहां एक नाबालिग बच्ची का अपहरण कर लिया गया। जब मां ने बदमाशों का विरोध किया तो उस पर जानलेवा हमला कर दिया गया। हमले में मां की मौके पर ही मौत हो गई, लेकिन इसके बावजूद आरोपी बच्ची को अगवा कर फरार हो गए।

घटना के दो दिन बीत जाने के बाद भी बच्ची का कोई सुराग नहीं लग सका है। गम और गुस्से में डूबे परिजनों ने मृतका का शव घर में ही रख छोड़ा है। परिवार ने साफ ऐलान कर दिया है कि जब तक हत्यारे गिरफ्तार नहीं होते और नाबालिग बेटी सुरक्षित बरामद नहीं हो जाती, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
दलित समाज में आक्रोश
गांव में आक्रोश चरम पर है। बड़ी संख्या में दलित समाज के लोग मौके पर जुटे हुए हैं। लोगों का कहना है कि सरकार भले ही यूपी में अपराध कम होने के दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। परिजनों का आरोप है कि यदि यही किसी प्रभावशाली व्यक्ति की बेटी होती तो पुलिस अब तक उसे खोज निकालती, लेकिन दलित की बेटी होने के कारण लापरवाही बरती जा रही है।
मामले ने पकड़ा राजनीतिक तूल
मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। भाजपा नेता संजीव बालियान पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे, वहीं आज़ाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर आज़ाद भी पुलिस को चकमा देकर गांव पहुंचे। कई दलों के नेता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौके पर मौजूद हैं।
परिवार की मांग दो टूक है—
“जब तक बेटी नहीं मिलेगी और हत्यारे जेल नहीं जाएंगे, तब तक मां का अंतिम संस्कार नहीं होगा।”
यह सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है। क्या अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि एक मां को मारकर बच्ची को उठा ले जाया जाए और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रहे? अब प्रशासन के पास बहाने का नहीं, परिणाम दिखाने का वक्त है। वरना यह आग सिर्फ कपासड़ा तक सीमित नहीं रहेगी।