लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
पादूकलां। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की पावन योगिनी एकादशी पर शनिवार को पादूकलां कस्बा भक्तिमय माहौल में सराबोर नजर आया। सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही श्री चारभुजानाथ मंदिर एवं श्री श्याम मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। दिनभर मंदिर परिसर हरिनाम संकीर्तन, शंखध्वनि और भगवान विष्णु के जयघोष से गूंजते रहे।
महिलाओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य और क्षेत्र की खुशहाली की कामना के साथ भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर 108 परिक्रमा लगाई। मंदिरों में विष्णु सहस्रनाम पाठ, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन देर शाम तक चलता रहा। पादूकलां सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे, जिससे मंदिरों में दिनभर मेले जैसा माहौल बना रहा।
श्री चारभुजानाथ मंदिर में भगवान विष्णु के त्रिविक्रम स्वरूप का विशेष श्रृंगार किया गया। भगवान को पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप-दीप, नैवेद्य और फलों का भोग अर्पित किया गया। श्रद्धालुओं ने माता लक्ष्मी एवं भगवान कुबेर की पूजा कर सुख-शांति, धन-धान्य और समृद्धि की कामना की।
मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्वयंसेवकों ने सेवाएं दीं। संध्या बेला में आयोजित महाआरती पूरे आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही। दीपों की स्वर्णिम आभा, शंखनाद और घंटियों की गूंज के बीच सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सामूहिक आरती में भाग लिया। आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। 
मंदिर पुजारी कैलाश वैष्णव, पंडित पुखराज शास्त्री एवं पंडित हस्तीमल उपाध्याय ने बताया कि योगिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत पुण्यदायी व्रत है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा-अर्चना करने से ज्ञात-अज्ञात पापों का क्षय होता है तथा जीवन में सुख, समृद्धि, आरोग्य और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। इसी आस्था के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने निर्जला एवं फलाहार व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना की।
एकादशी का उत्साह बाजारों में भी देखने को मिला। फल, दूध, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, मेवा तथा अन्य फलाहार सामग्री की दुकानों पर दिनभर खरीदारों की भीड़ रही। व्यापारियों ने बताया कि पर्व के कारण सामान्य दिनों की तुलना में कारोबार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
वहीं, श्री श्याम मंदिर में भी बाबा श्याम के दर्शन, भजन-कीर्तन और महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। युवाओं ने दर्शन व्यवस्था, प्रसाद वितरण और सेवा कार्यों में सक्रिय सहयोग दिया, जबकि महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की सामूहिक उपस्थिति ने सामाजिक समरसता और धार्मिक एकता का संदेश दिया।
योगिनी एकादशी के अवसर पर पादूकलां में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आस्था केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, सेवा, संस्कार और सामूहिक सहभागिता को मजबूत करने का भी सशक्त माध्यम है।