लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
(रिपोर्ट: दुर्योधन मयंक, उनियारा)
उनियारा। श्री दिगम्बर जैन सुखोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र सुथड़ा में जैन धर्म के तीसरे तीर्थंकर संभवनाथ भगवान का निर्वाण कल्याणक महा महोत्सव मनाया गया।
प्रबंध समिति के अध्यक्ष महावीर प्रसाद पराणा और मनोज जैन ने बताया कि संभवनाथ भगवान वर्तमान काल चक्र के तीसरे तीर्थंकर थे। उनका शरीर स्वर्णिम वर्ण का था और उनकी ऊँचाई 400 धनुष थी। संभवनाथ भगवान का प्रतीक घोड़ा है। त्रिमुख यक्ष देव और दुरितारी यक्षिणी देवी क्रमशः भगवान के शासन देव और शासन देवी माने जाते हैं।
चौदह वर्षों की साधना के बाद उन्हें केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई। अर्हत संभवनाथ ने सांसारिक अस्तित्व की क्षणभंगुर प्रकृति पर अपना पहला प्रवचन दिया और लंबे समय तक धर्म के प्रसार में कार्यरत रहे। उनके निर्वाण का दिन चैत्र शुक्ल षष्ठी को सम्मेद शिखरजी (मधुबन, झारखंड) पर हुआ। उन्होंने 1000 मुनियों के साथ मासक्षमण तप के बाद मिथुन राशि और आर्द्रा नक्षत्र में कायोत्सर्ग मुद्रा (ध्यान मुद्रा) में मोक्ष प्राप्त किया।
शास्त्री प्रिंस जैन देवांश के निर्देशन में सर्वप्रथम मंगलाष्टक कर नित्य अभिषेक शांति धारा की गई। मूलनायक शम्भूकुमार, सोनू कुमार मालपुरा, मुकेश कुमार, हेमंत कुमार चौथ का बरवाड़ा, वार्षिक शांतिधारा रमेशचंद, रौनक सर्राफ जयपुर, पांडुशिला पर महावीर प्रसाद, पदमचंद मेहंदी वाले ने की।
इसके बाद देव शास्त्र पूजा, चौबीस भगवान की मुलनायक और संभवनाथ भगवान की पूजा कर निर्वाण कल्याणक महोत्सव संपन्न हुआ।
भक्तामर संयोजक हुकुमचंद शहर वाले एवं नरेंद्र जैन बनेठा ने बताया कि सांय 7:00 बजे श्रेष्ठी परिवार राजेंद्र पटौदी, दिनेश कुमार, सुनील कुमार, मनोज कुमार, रचित कुमार, वासु कुमार, कृष कुमार, भव्य कुमार, मिताश कुमार पटौदी परिवार और मंगलवार भक्तामर मंडल ककोड़ द्वारा भक्तामर दीपार्चना सानंद संपन्न की गई।
