लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
राज किसान साथी पोर्टल से जुड़ेगा डिजिटल प्लेटफॉर्म, छोटे और सीमांत किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ
जयपुर | रूपनारायण सांवरिया
राजस्थान सरकार के कृषि विभाग और टैफे–जेफार्म सर्विसेज के बीच गुरुवार को पंत कृषि भवन में कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का उद्देश्य प्रदेश के छोटे एवं सीमांत किसानों को आधुनिक कृषि मशीनरी आसानी से और किफायती दरों पर उपलब्ध कराना है।
एमओयू के तहत किसान जेफार्म सर्विसेज के डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ट्रैक्टर और कृषि उपकरण बिना किसी अतिरिक्त सेवा शुल्क के किराए पर ले सकेंगे। इस प्लेटफॉर्म को राज किसान साथी पोर्टल से भी जोड़ा जाएगा, ताकि किसानों को डिजिटल माध्यम से सहज और पारदर्शी सेवाएं मिल सकें।
खेती के हर चरण में मिलेगा आधुनिक यंत्रों का लाभ
समझौते के तहत भूमि तैयारी, बुआई, कटाई और पोस्ट-हार्वेस्टिंग तक कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा कस्टम हायरिंग सेंटर (CHCs), ट्रैक्टर मालिकों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और किसानों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़कर कृषि यंत्र किराया व्यवस्था को मजबूत बनाया जाएगा।
साथ ही किसान जागरूकता कार्यक्रम, प्रदर्शन, किसान गोष्ठियां और प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। किसानों, एफपीओ, ग्रामीण युवाओं, महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs), छात्रों और एग्री-स्टार्टअप्स के लिए क्षमता विकास एवं ज्ञान-साझाकरण कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।
हर ग्राम पंचायत में कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने की योजना
प्रमुख शासन सचिव (कृषि एवं उद्यानिकी) मंजू राजपाल ने कहा कि कस्टम हायरिंग सेंटर कृषि यंत्रीकरण को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण मॉडल है। सरकार की योजना प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने की है, जिनका संचालन सहकारी समितियां, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), फेडरेशन या निजी उद्यमी कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि इन केंद्रों के माध्यम से महंगे कृषि यंत्र, जिन्हें छोटे किसान खरीदने में सक्षम नहीं हैं, वे आवश्यकता के अनुसार किराए पर उपलब्ध हो सकेंगे। इससे खेती की लागत कम होगी, कृषि कार्य समय पर होंगे और किसानों की आय बढ़ेगी। विभाग इन केंद्रों की नियमित मॉनिटरिंग और पारदर्शी संचालन भी सुनिश्चित करेगा।
कृषि यंत्रीकरण को मिलेगा नया विस्तार
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने कहा कि इस साझेदारी से प्रदेश के छोटे एवं सीमांत किसानों को कृषि यंत्रीकरण और डिजिटल सेवाओं का अधिक लाभ मिलेगा। इससे ट्रैक्टर एवं कृषि उपकरण किराया व्यवस्था मजबूत होगी और राज्य में सतत कृषि विकास को गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि टैफे–जेफार्म सर्विसेज के साथ यह समझौता प्रदेश के हर किसान तक आधुनिक कृषि यंत्र पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
पहले भी 32 संस्थाओं के साथ हुए थे एमओयू
गौरतलब है कि 10 जुलाई को कृषि विभाग ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल मार्केटिंग (NIAM), 10 एग्रीटेक स्टार्टअप्स और 20 सिविल सोसाइटी संगठनों (CSOs) सहित कुल 32 संस्थाओं के साथ भी एमओयू किए थे। इन साझेदारियों का उद्देश्य प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, आधुनिक तकनीकों के प्रसार और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में कार्य करना है।
इन पहलों के तहत किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती का प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, प्रमाणन, मूल्य संवर्धन और बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। विशेष रूप से छोटे एवं सीमांत किसान, महिला किसान, युवा किसान और जनजातीय क्षेत्रों के कृषकों को इन योजनाओं का लाभ मिलेगा।
एमओयू हस्ताक्षर कार्यक्रम में आयुक्त (उद्यानिकी) श्वेता चौहान, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, टैफे के प्रतिनिधि तथा जिला परिषदों के संयुक्त निदेशक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।