लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
147 नगर निकायों में दूसरे चरण का मतदान शुरू
जयपुर। राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के दूसरे चरण के लिए मतदान प्रक्रिया आज सुबह 7 बजे से शुरू हो गई है। मतदान शाम 7 बजे तक चलेगा। दूसरे चरण के मतदान में प्रदेश के कई बड़े सियासी चेहरों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत कई मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के लिए यह चुनाव अहम माना जा रहा है।
दूसरे चरण में 147 नगर निकायों में मतदान हो रहा है। इन निकायों के अंतर्गत करीब 100 विधानसभा क्षेत्रों का हिस्सा आता है। ऐसे में इन क्षेत्रों में चुनावी नतीजे संबंधित करीब 100 विधायकों के लिए भी राजनीतिक प्रदर्शन का पैमाना बन सकते हैं। चुनाव परिणामों से यह संकेत मिलेगा कि अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में विधायक जनता और संगठन के बीच कितना प्रभाव बनाए हुए हैं।
सांगानेर, विद्याधर नगर और झोटवाड़ा पर खास नजर
जयपुर में दूसरे चरण के मतदान को लेकर खास तौर पर सांगानेर, विद्याधर नगर और झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्रों पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं। सांगानेर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का विधानसभा क्षेत्र है, जबकि विद्याधर नगर से उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी विधायक हैं। वहीं झोटवाड़ा क्षेत्र में उद्योग मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ का प्रभाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इन क्षेत्रों में नगर निकाय चुनाव के नतीजे सरकार और इन नेताओं की स्थानीय पकड़ को लेकर भी राजनीतिक संदेश दे सकते हैं।
कोटा से जोधपुर तक बड़े नेताओं की परीक्षा
कोटा में पूर्व मंत्री शांति धारीवाल और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से जुड़े राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी मतदान हो रहा है। जोधपुर में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रभाव वाले क्षेत्रों पर भी राजनीतिक विश्लेषकों की नजर है।
इसी तरह अजमेर में भागीरथ चौधरी और विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, जबकि पाली में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ समेत कई वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों की प्रतिष्ठा चुनावी परिणामों से जुड़ी हुई है।
बागियों ने बढ़ाई भाजपा-कांग्रेस की चिंता
नगर निकाय चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती पार्टी उम्मीदवारों के सामने बागी उम्मीदवारों की है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के कई स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के चुनाव मैदान में उतरने से अधिकृत उम्मीदवारों के सामने मुकाबला कठिन हो गया है।
कई वार्डों में बागी उम्मीदवारों ने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के समीकरण बिगाड़ दिए हैं। ऐसे में मतदान के बाद आने वाले परिणाम यह तय करेंगे कि मतदाताओं ने पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों पर भरोसा जताया या स्थानीय स्तर पर बागियों और निर्दलीय उम्मीदवारों को तरजीह दी।
नेताओं के लिए अर्धवार्षिक परीक्षा से कम नहीं चुनाव
राजस्थान के बड़े नेताओं और करीब 100 विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों के लिए यह चुनाव एक तरह से राजनीतिक अर्धवार्षिक परीक्षा माना जा रहा है। सरकार के कामकाज, स्थानीय विकास, संगठन की सक्रियता और नेताओं की व्यक्तिगत पकड़ का असर नगर निकाय चुनाव के परिणामों में दिखाई दे सकता है।
अब निगाहें मतदान प्रतिशत और वार्डवार नतीजों पर टिकी हैं। खासतौर पर सांगानेर, विद्याधर नगर, झोटवाड़ा, कोटा, जोधपुर, अजमेर और पाली जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों के परिणाम प्रदेश की आगामी सियासत के लिए भी संकेत देने वाले माने जा रहे हैं।
