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लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
अंता -बारा, जयपुर। राजस्थान में हो रहे अंता विधानसभा सीट पर उपचुनाव में चुनाव मैदान में निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा एक बार फिर विवाद में में फंस गए हैं। चुनाव प्रचार के लिए रात बीती रात खान झोपड़ी गांव गए थे जहां एक मंदिर पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने लोगों से वोट देने की अपील की। इसी दौरान भीड़ में खड़े एक युवक ने कहा कि 25 साल हो गए वोट देते- देते सब आते हैं, वोट लेकर चल जाते हैं इस पर गुस्साए नरेश मीणा ने उसे कहा कि इसे मेरे पास आने दो मैं उसे सुनूंगा, नरेश मीणा ने युवक को अपने पास बुलाने की कोशिश की लेकिन फिर कुछ लोगों से मंदिर पर चढ़ने से रोक दिया। इस दौरान नरेश मीणा ने माइक उसके मुंह के आगे लगा दिया, जब वह कुछ बोलने लगा तो नरेश ने माइक उसके मुंह में घुसड़ने की कोशिश की, एक-दो- बार धक्का मारा युवक पीछे हट गया इसके बाद नरेश मीणा ने कहा कि इस साले चोर ने शराब पी रखी है ,फिर उसने प्रमोद जैन भाया का नाम लेकर गाली देते हुए, प्रमोद जैन भाया को जमकर कोसा। इस दौरान कुछ लोग विरोध करने वाले युवक को मंच से दूर ले गए ,उसके साथ हाथापाई की।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने से बावल
सोशल मीडिया का जमाना है यह पूरा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया । वीडियो वायरल हो गया तो बवाल मचना तय था। विपक्षियों ने भी मामले को लपक लिया और अब नरेश मीणा के व्यवहार को लेकर सवालिया निशान उठाए जा रहे हैं ।उन पर लड़ाकू होने का आरोप लगाया जा रहा है । कहा जा रहा है कि यह आम कार्यकर्ता के साथ मारपीट कर देता है ,कभी भी गुस्सा हो जाता है, गाली गलोच करता है ,अपने से वरिष्ठ नेताओं के साथ भी अभद्र व्यवहार करता है।
प्रमोद जैन भाया के साथ तो खुलेआम गाली गलोच और धमकी देता है ऐसे आदमी को कैसे वोट दें? नरेश मीणा की छवि लगातार बिगड़ती जा रही है अब नरेश मीणा के पुराने मामलों को भी लोग चुनाव में उछल रहे हैं । जैसे समरावता में एसडीएम को थप्पड़ मारना। इससे पूर्व पिपलोदा गांव में सात बच्चों की मौत के मामले में शहीद स्मारक पर धरने के दौरान कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट का वीडियो भी वायरल किया जा रहा हैं । कुल मिलाकर नरेश मीणा की छवि को धूमिल करने की कोशिश की जा रही है।
मेरी छवि धूमिल करने की कोशिश नरेश मीणा
नरेश मीणा का कहना है कि कुछ लोग मेरी छवि खराब करना चाह रहे हैं । लेकिन यह वीडियो है इसको कैसे छुपाया जाए ? सोशल मीडिया है, सोशल मीडिया का जमाना है। एक चैनल हो .,एक एक अखबार हो, एक एक यूट्यूब चैनल हो तो समझ में आता है, लेकिन यहां तो हजारों लोगों के पास यह वीडियो चैनलों में पहुंच चुका है। लाखों लोगों के मोबाइल में पहुंच चुका है,ऐसे में अब इनको छुपाया जाना मुश्किल है। लेकिन इससे कहीं-न कहीं नरेश मीणा की किरकिरी हो रही है। उनके समर्थकों को भी नीचे देखना पड़ रहा है, सबसे बड़ी बात है कि जैसे चुनाव नजदीक आएंगे नरेश मीणा की छवि को इसी तरह से कुछ लोग बिगाड़ने की भी कोशिश करेंगे । कुछ लोग उत्साहित भी करेंगे जिससे कि नरेश मीणा इस तरह का आचरण करें लेकिन अभी सबसे बड़ी बात है कि नरेश मीणा को अपने व्यवहार में थोड़ा संयमित होना पड़ेगा। अपनी भाषा पर भी कंट्रोल करना पड़ेगा और जो बात-बात में लात घूंसे चलाने की कोशिश करते हैं ,उसे पर भी नियंत्रण रखना होगा। क्योंकि वह जनप्रतिनिधि बनने जा रहे हैं एक जनप्रतिनिधि को अपनी भाषा पर संयम रखना, लगाम रखना बहुत जरूरी है, वह क्या बोल रहा है, उसकी हर बात के मायने होते हैं, लेकिन यहां नरेश मीणा को हमेशा बोलचाल के मामले में अपनी वाणी के कारण ही नुकसान उठाना पड़ रहा है। राजनीतिक दलों ने भी उनके बड़बोलेपन के कारण उनको कई बार जो स्थान में मिलना चाहिए था और नहीं मिल पाया और कांग्रेस में भी हो बार-बार इसलिए उनको नुकसान हुआ। अब क्योंकि मतदान होने वाला है 11 तारीख को मतदान होना है और अभी तक नरेश मीणा इस पूरे चुनाव को त्रिकोणात्मक बनाए हुए हैं ऐसी स्थिति में नरेश मीणा को अपने व्यवहार पर बहुत ज्यादा नियंत्रण रखना होगा, वरना तो आने वाले समय में उनकी छवि और ज्यादा खराब होगी तो उसका नुकसान होगा। उन्हें चाहिए कि जो टेंपरामेंट उनका है उसे कंट्रोल करें, संयमित भाषा का उपयोग करें और अच्छे से चुनाव लड़े, चुनाव में हार जीत सब तकदीर का खेल होती है। इंदिरा गांधी से लेकर नरेंद्र मोदी तक अटल बिहारी वाजपेई तक सभी नेता चुनाव हारे हैं । हार जीत कोई मायने नहीं रखती लेकिन चुनाव को चुनाव के तरीके से लड़ना पड़ता है । यह राजस्थान है यहां तो चुनाव तरीके से और दमदारी से लड़ना पड़ता है, ना की दादागिरी से, चुनाव नहीं लड़ा जा सकता है ,ना ही दादागिरी से चुनाव जीता जा सकता है।
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