लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
मातृ मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से कम, संस्थागत प्रसव 94.9% तक पहुँचा
जयपुर । मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल और चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के मार्गदर्शन में राजस्थान में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया जा रहा है। राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के चलते गाँवों और ढाणियों तक स्वास्थ्य सेवाएँ विस्तार पा रही हैं, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर तक लाने में सफलता मिल रही है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई नवाचार और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
हाल ही में जारी एसआरएस सर्वे के अनुसार प्रदेश में मातृ मृत्यु दर घटकर 86 प्रति एक लाख जीवित जन्म हो गई है, जो राष्ट्रीय औसत से कम है। वहीं, 94.9 प्रतिशत संस्थागत प्रसव सुनिश्चित कर प्रदेश अन्य राज्यों के मुकाबले बेहतर स्थिति में है।
✅ एएनसी रजिस्ट्रेशन और प्रसव पूर्व देखभाल
गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एएनसी रजिस्ट्रेशन के साथ कम से कम 4 प्रसव पूर्व जांच की जाती है। उन्हें आयरन व कैल्शियम की गोलियाँ दी जाती हैं, साथ ही दो डोज़ डीटी टीके लगाए जाते हैं। प्रत्येक माह की 9, 18 और 27 तारीख को पीएचसी से लेकर उच्चतर चिकित्सा संस्थानों तक विशेष जांच सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं को निःशुल्क दवा, जांच, रेफरल, भर्ती, कलेवा और आवश्यकता होने पर निःशुल्क रक्त उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रत्येक प्रसव में प्रसव सखी की व्यवस्था कर प्रसूता को मानसिक व शारीरिक सहारा दिया जा रहा है। इसके साथ ही जेएसवाई और लाडो प्रोत्साहन योजना का लाभ सीधे बैंक खातों में प्रदान किया जा रहा है।
✅ सुसज्जित प्रसव कक्ष और विशेषज्ञ सेवाएं
स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए प्रदेश में 2065 डिलीवरी प्वाइंट, 42 एमसीएच इकाइयाँ, तथा 114 जेएसवाई वार्ड संचालित किए जा रहे हैं।
राज्य में 160 एफआरयू केंद्रों में से 106 पर सिजेरियन विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हैं। शेष केंद्रों पर सामान्य प्रसव की सेवाएं दी जा रही हैं। लक्ष्य कार्यक्रम के तहत 95 लेबर रूम और 44 ऑपरेशन थिएटर को भारत सरकार द्वारा प्रमाणित किया जा चुका है।
✅ निःशुल्क सोनोग्राफी हेतु मा-वाउचर योजना
निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार की मा-वाउचर योजना दूरस्थ क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को निःशुल्क सोनोग्राफी की सुविधा प्रदान कर रही है। जहाँ सरकारी अस्पतालों में सोनोग्राफी की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहाँ अधिकृत निजी केंद्रों पर क्यूआर कोड आधारित वाउचर से सेवा उपलब्ध कराई जा रही है।
अब तक 2 लाख से अधिक कूपन जारी किए जा चुके हैं, जिनके आधार पर लगभग 1.5 लाख महिलाओं ने निःशुल्क सोनोग्राफी का लाभ उठाया है। योजना के तहत प्रतिवर्ष 3 लाख गर्भवती महिलाओं को सेवा प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित है।
राज्य सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है — माताओं और नवजातों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना, समय पर उपचार उपलब्ध कराना और मातृ मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर तक लाकर स्वस्थ पीढ़ी का निर्माण करना।
यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाएगी, बल्कि सामाजिक व आर्थिक विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान करेगी।
