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भारत में दो ट्रेन एक फ्री दूसरी सबसे महंगी

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
सांभर (हेमन्त शर्मा)
जी, हां भारत में दो रेलगाड़ियां ऐसी हैं, जिनमें एक 1948 से आज तक फ्री चल रही है अर्थात एक पैसा टिकट का नहीं और दूसरी ऐसी जो विश्व की सबसे महंगी ट्रेन प्रति किलोमीटर 400-500 रूपए टिकट। दिलचस्प बात यह है कि दोनों का संचालन सरकारी संस्थान कर रहे हैं।
पहली ट्रेन है नांगल पंजाब से भाखड़ा हिमाचल तक तेरह किलोमीटर चलती है।‌ भाखड़ा नांगल बांध निर्माण के लिए निर्माण सामग्री तथा श्रमिकों अधिकारियों व इंजीनियरों को लाने ले जाने के लिए पटरी बिछाई गई और ट्रेन चलाई गई। भाखड़ा नांगल बांध का निर्माण पूरा हुए छह दशक हो गये, यह ट्रेन आज भी निःशुल्क चलती है।
इस ट्रेन का लाभ स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को मिलता है जो दूर दूर से भाखड़ा नांगल बांध देखने आते हैं। तेरह किलोमीटर की दूरी पर छह स्टेशन हैं, शिवालिक पहाड़ियों का मनोरम दृश्य है और सबसे महत्वपूर्ण है सतलज नदी पर बना पुल। पूरा प्राकृतिक नजारा आकर्षण का केंद्र है। इस ट्रेन के डिब्बे लकड़ी के बने हैं और कराची से आये थे। पहले यह भाप के इंजन से चलती थी अब डीजल से चलती है। ट्रेन परिचालन में डीजल, रख रखाव, स्टाफ आदि का खर्च भाखड़ा व्यास मैनेजमेंट बोर्ड वहन करता है।

 

यह टूरिज्म ट्रेन है जो स्वदेश दर्शन योजना के तहत
बात दूसरी ट्रेन की, यह टूरिज्म ट्रेन है जो स्वदेश दर्शन योजना के तहत भारत और राजस्थान सरकार के पर्यटन विभाग ने सांभर साल्ट्स लि को सौंपी थी और मकसद था सांभर झील एरिया की विजिट पर्यटकों को यह ट्रेन करवाये। स्वदेश दर्शन योजना के तहत दोनों सरकारों ने मिलकर सांभर में टूरिज्म इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर एक सौ करोड़ रुपए खर्च किए, जिसमें साठ करोड़ रुपए से अधिक का खर्च सांभर साल्ट्स एरिया में किया गया।‌ इस तरह सांभर साल्ट्स लि को यह इन्फ्रास्ट्रक्चर और ट्रेन सरकार से उपहार में मिले। यहां सांभर साल्ट्स लि ने व्यवसायिक दृष्टिकोण अपनाया और इस ट्रेन को विश्व की सबसे महंगी ट्रेन बना दिया। भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्यरत राजस्थान व भारत सरकार का साझा उपक्रम है सांभर साल्ट्स लि, लेकिन प्रबंधन भारत सरकार का है। अतः भारत सरकार के निर्देश अनुसार इस ट्रेन का किराया तय किया गया है अथवा सांभर साल्ट्स लि के निदेशक मंडल ने किया है या भारत व राजस्थान सरकार के पर्यटन मंत्रालय की अनुशंसा पर हुआ है, यह अंदर की बात है, लेकिन तीन किलोमीटर की कुल यात्रा का 1200-1500 रूपए प्रति व्यक्ति सांभर साल्ट्स लि ले रही है।
ट्रेन व शूटिंग हो निःशुल्क
प्रमुख आर्थिक विश्लेषक कैलाश शर्मा कहते हैं, सांभर झील विश्व को प्रकृति का वरदान है।‌ भाखड़ा व्यास मैनेजमेंट बोर्ड से प्रेरणा लेकर सांभर साल्ट्स लि इस ट्रेन की यात्रा निःशुल्क सुनिश्चित करे। दूसरे यह कि प्रकृति के वरदान का विश्व स्तर पर टूरिज्म डेस्टीनेशन के तौर पर व्यापक प्रचार प्रचार प्रसार हो, इसके लिए सांभर साल्ट्स लि सांभर झील एरिया और सांभर साल्ट्स परिसर में फिल्म-वेब सीरियल, वीडियो-प्री वैडिंग शूट तथा फोटोग्राफी की निःशुल्क अनुमति दे। इससे सांभर की टूरिज्म इकोनॉमी करवट लेगी और सांभर अपने गौरवशाली अतीत की ओर फिर से लौट सकेगा।

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