लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
न्याय और जनता की जीत: गोपाल माली
भीलवाड़ा । सुप्रीम कोर्ट के हालिया दो अहम फैसलों ने देश की जनता को बड़ी राहत दी है और न्यायपालिका के प्रति विश्वास को और मजबूत किया है। इन निर्णयों के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अरावली पर्वतमाला, पर्यावरण संरक्षण और पीड़ितों के अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
अरावली की परिभाषा बदलने को लेकर दिए गए पुराने फैसले पर रोक लगाकर सुप्रीम कोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि वह इस संवेदनशील मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रहा है। साथ ही, पूर्व में की गई टिप्पणी पर भी रोक लगाकर न्यायालय ने निष्पक्षता और संतुलन का परिचय दिया है।
स्टेट फेडरेशन ऑफ यूनेस्को एसोसिएशन इन राजस्थान के प्रदेश संयोजक गोपाल लाल माली ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय जनता की आवाज़ का सम्मान है, अरावली की पुकार को सुनने का प्रमाण है और खनन माफियाओं के मंसूबों पर करारा प्रहार है। उन्होंने कहा कि यह फैसला पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
गोपाल माली ने अरावली को बचाने के लिए संघर्ष और आंदोलन करने वाले प्रदेशभर के सभी संगठनों और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि जनवरी में आने वाला अंतिम निर्णय भी जनभावनाओं और पर्यावरण संरक्षण के पक्ष में ही होगा। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो बाबा डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा संविधान में प्रदत्त संघर्ष और आंदोलन के अधिकार के तहत जनता के साथ खड़े रहकर हर लड़ाई लड़ी जाएगी।
इसके साथ ही उन्होंने उन्नाव मामले में पूर्व भाजपा विधायक को दी गई जमानत को रद्द किए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल पीड़िता के साथ न्याय है, बल्कि पूरे देश को यह भरोसा दिलाने वाला संदेश भी है कि सत्ता कानून और न्याय से ऊपर नहीं हो सकती। यह फैसला महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और न्याय के प्रति न्यायपालिका की अडिग प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
