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केओलादेव राष्ट्रीय उद्यान में हुआ वन्यजीव सप्ताह-2025 का शुभारंभ

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

भरतपुर : आज केओलादेव राष्ट्रीय उद्यान, भरतपुर में वन्यजीव सप्ताह-2025 का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में  पी. कातिरवेल, मुख्य वन संरक्षक, भरतपुर और  मानस सिंह, उप वन संरक्षक (वन्यजीव) उपस्थित रहे।

उद्यान में आयोजित इस कार्यक्रम में स्काउट्स एवं गाइड्स, एनसीसी कैडेट्स, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, रिक्शा चालक, नेचर गाइड्स और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम का समन्वयन क्षेत्रीय वन अधिकारी (फ्लाइंग) भरत लाल वर्मा द्वारा किया गया।

उद्घाटन अवसर पर स्वच्छता अभियान का आयोजन भी किया गया, जिसमें एनसीसी कैडेट्स, स्काउट्स-गाइड्स और वनकर्मियों ने पार्क परिसर को स्वच्छ रखने का संदेश दिया। इस दौरान 300 से अधिक विद्यालयी बच्चों ने राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण किया और जैव विविधता, पक्षी संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त की।

वन्यजीव सप्ताह में आयोजित गतिविधियां

वन्यजीव सप्ताह के दौरान बच्चों और युवाओं के लिए विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें शामिल हैं:

  • निबंध लेखन प्रतियोगिता

  • चित्रकला प्रतियोगिता

  • वाद-विवाद प्रतियोगिता

  • प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता

इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण के प्रति बच्चों में रुचि और जिम्मेदारी पैदा करना है।

“केओलादेव मित्र कार्यक्रम” का शुभारंभ

इस अवसर पर “केओलादेव मित्र कार्यक्रम” का भी शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम मुख्य वन संरक्षक  पी. कातिरवेल की अभिनव परिकल्पना है, जिसका उद्देश्य है कि भरतपुर के प्रत्येक बालक-बालिका को केओलादेव राष्ट्रीय उद्यान से जोड़ा जाए, ताकि भावी पीढ़ी में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव विकसित हो।

 पी. कातिरवेल ने अपने उद्बोधन में कहा, “केओलादेव राष्ट्रीय उद्यान न केवल भरतपुर बल्कि सम्पूर्ण भारत के लिए गौरव का विषय है। इसे स्वच्छ, संरक्षित और जीवंत बनाए रखना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। बच्चों से मैं अपील करता हूँ कि वे अपने जीवन में पर्यावरण संरक्षण को आदत बनाएं।”

उप वन संरक्षक  मानस सिंह ने भी बच्चों और प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि वन्यजीव संरक्षण तभी सफल होगा जब समाज का हर वर्ग इसके लिए जिम्मेदारी से आगे आए। उन्होंने बताया कि वन विभाग द्वारा स्थानीय समुदाय, रिक्शा चालकों, नेचर गाइड्स और बच्चों को संरक्षण गतिविधियों से लगातार जोड़ा जा रहा है।

वन्यजीव सप्ताह के आयोजन से न केवल बच्चों में पर्यावरणीय चेतना का विकास होगा, बल्कि स्थानीय समुदाय भी उद्यान संरक्षण की प्रक्रिया से और गहराई से जुड़ सकेगा।

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