लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
क्या निर्दलीयों के सहारे खिलेगा कमल या सोलंकी के अनुभव से बदलेगा सियासी गणित?
राजस्थान से वरिष्ठ संवाददाता : नितिन मेहरा
जोधपुर। सूर्यनगरी जोधपुर के नगर निगम में महापौर की कुर्सी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भाजपा ने प्रसन्न चंद मेहता और कांग्रेस ने राजेंद्र सोलंकी को महापौर पद का प्रत्याशी बनाया है। दोनों नेताओं के नामांकन के साथ ही 100 सदस्यीय नगर निगम में बहुमत के जादुई आंकड़े 51 तक पहुंचने की जद्दोजहद तेज हो गई है।
हालिया चुनाव परिणामों में भाजपा और कांग्रेस को शुरुआती तौर पर 44-44 सीटें मिली थीं। वार्ड 50 के पुनर्मतदान के बाद भाजपा की संख्या बढ़कर 45 हो गई। इसके बाद भाजपा ने सात निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा किया है, जिससे उसका समर्थित आंकड़ा 52 पहुंचने की बात कही जा रही है। हालांकि यह संख्या फिलहाल भाजपा का दावा है और महापौर चुनाव में वास्तविक समर्थन मतदान के दौरान ही स्पष्ट होगा।
मेहता बनाम सोलंकी, दोनों के अपने सियासी समीकरण
भाजपा ने प्रसन्न चंद मेहता को मैदान में उतारा है। मेहता वार्ड 82 से भाजपा के टिकट पर पार्षद चुने गए हैं और उन्हें संगठन में लंबे अनुभव वाला नेता माना जाता है। वे भाजपा में जिला अध्यक्ष और प्रदेश उपाध्यक्ष जैसे संगठनात्मक पदों पर भी रह चुके हैं।
वहीं कांग्रेस ने राजेंद्र सोलंकी को प्रत्याशी बनाया है। सोलंकी ने हालिया नगर निगम चुनाव में पार्षद का चुनाव नहीं लड़ा। वे पूर्व राज्य मंत्री, जोधपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष और नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी नेताओं में गिना जाता है।
51 के आंकड़े पर टिकी निगाहें
100 सदस्यीय सदन में महापौर चुनाव के लिए बहुमत का आंकड़ा 51 है। मौजूदा स्थिति में भाजपा के पास 45 निर्वाचित पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस के 44 पार्षद हैं। शेष पार्षदों का समर्थन दोनों खेमों के लिए महत्वपूर्ण है।
भाजपा सात निर्दलीय पार्षदों के समर्थन के साथ 52 का आंकड़ा होने का दावा कर रही है। दूसरी ओर कांग्रेस भी अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश में है। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों और अन्य गुटों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
बाड़ेबंदी और क्रॉस वोटिंग की चुनौती
महापौर चुनाव से पहले दोनों दल अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। राजनीतिक खेमों की नजर संभावित क्रॉस वोटिंग और अंतिम समय में बदलने वाले समीकरणों पर भी है।
भाजपा के सामने अपने घोषित समर्थक पार्षदों को एकजुट रखने की चुनौती है, जबकि कांग्रेस के सामने बहुमत के लिए जरूरी अतिरिक्त समर्थन जुटाने का सवाल है। ऐसे में अगले कुछ दिन जोधपुर नगर निगम की सियासत के लिए अहम माने जा रहे हैं।
25 सितंबर को होगा फैसला
जोधपुर नगर निगम के महापौर पद के लिए मतदान 25 सितंबर 2026 को होना निर्धारित है। जयपुर, जोधपुर और कोटा में महापौर चुनाव की प्रक्रिया पहले लंबित परिणामों के कारण टली थी, जिसके बाद पुनर्मतदान और मतगणना पूरी होने पर अब महापौर चुनाव का रास्ता साफ हुआ है।
अब निगाहें 25 सितंबर के मतदान पर हैं, जब नगर निगम सदन में सामने आएगा कि घोषित समर्थन वास्तव में मतदान में कितना बदलता है और जोधपुर की महापौर की कुर्सी पर किस खेमे को बहुमत का समर्थन मिलता है।
