लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
सिरोही/जालोर: राजस्थान के जालोर जिले के बाकरा गांव की एक विवाहिता अपने अधिकार और वैवाहिक रिश्ते को बचाने के लिए लंबे समय तक अधिकारियों के चक्कर काटती रही, लेकिन आरोप है कि समय पर कार्रवाई नहीं होने के कारण उसके पति ने रेवदर क्षेत्र के डाक गांव में दूसरी शादी रचा ली।
पीड़िता संतोष कंवर ने बताया कि उसकी शादी वर्ष 2011 में रमेश सिंह रावणा राजपूत के साथ हुई थी। 15 साल के वैवाहिक जीवन में उनके दो बच्चे भी हैं, लेकिन अब वह अपने पति के घर की बजाय न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
पीड़िता के अनुसार, उसका पति काम के सिलसिले में चेन्नई गया था। आर्थिक स्थिति सुधरने के साथ ही रिश्तों में दूरी बढ़ती गई और अब हालात ऐसे हो गए कि उसके जीवित रहते ही पति ने दूसरी शादी की तैयारी शुरू कर दी।

पुलिस पर लापरवाही के आरोप
पीड़िता का आरोप है कि उसने पहले संबंधित थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन उसे उचित सहायता नहीं मिली और आदेश लाने की बात कहकर लौटा दिया गया।
मामला जब विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सावित्री आनंद तक पहुंचा, तो उन्होंने एसपी और रेवदर सीओ को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बावजूद, कथित रूप से पुलिस की देरी के कारण आरोपी दूसरी शादी करने में सफल हो गया।
पारिवारिक विवाद से बढ़कर सामाजिक समस्या
यह मामला केवल पति-पत्नी के विवाद तक सीमित नहीं है। पीड़िता का कहना है कि आटा-साटा प्रथा के तहत उसके परिवार की एक लड़की की शादी आरोपी के परिवार में हुई थी, जो अब अपने ससुराल से अलग होकर पीहर में रह रही है।
इस पूरे घटनाक्रम से दोनों परिवारों के बच्चे माता-पिता के स्नेह और साथ से दूर हो गए हैं, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।
न्याय की मांग, प्रशासन पर सवाल
पीड़िता का कहना है कि वह सब कुछ अपनी आंखों के सामने होते देखती रही, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब वह न्याय की मांग कर रही है।
इस घटना ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—यदि समय पर कार्रवाई होती, तो क्या यह दूसरी शादी रोकी जा सकती थी?
फिलहाल मामला चर्चा में है और पीड़िता को न्याय मिलने का इंतजार है।