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जयपुर के महाराजा प्रताप सिंह की मृत्यु के बाद  कुंवारी ही रही उनकी मेवाड़ी मंगेतर

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

मेवाड़ की राजकुमारी चांद कंवर की सगाई जयपुर के महाराजा प्रताप सिहं से हुई थी

जितेन्द्र सिंह शेखावत
वरिष्ठ पत्रकार

*मेवाड़ की राजकुमारी चांद कंवर की सगाई जयपुर के महाराजा प्रताप सिहं से हुई थी। मेवाड़ महाराणा भीम सिंह की बड़ी बहन और महाराणा अरि सिंह की पुत्री चांद कंवर की सगाई के बाद पति महाराजा प्रताप सिंह की मृत्यु हो गई थी।

चांद कंवर ने अपनी मां से कहा….. मैंने पति देव का मुख भी नहीं देखा है। जयपुर से आए सगाई के दस्तूर में आए नारियल को ही देखा है । अब मैं किसी अन्य रियासत में विवाह नहीं करूंगी ।सवाई प्रताप सिंह को ही अपना पति परमेश्वर मान कर अपना शेष जीवन विधवा रहकर ही बिताऊंगी । इतिहासकार डा. राघवेन्द्र सिंह मनोहर के मुताबिक मेवाड़ की वट अविवाहित राजकुमारी चांद कंवर जीवन भर कुंवारी रही और उसने जयपुर को अपना ससुराल माना ।
**मेवाड़ की यह राजकुमारी* *_जयपुर राज घराने से पत्र व्यवहार भी करती रही ।_* *होने वाले पति प्रताप सिंह के बाद जयपुर की गद्दी पर बैठे उनकी अन्य एक महाराणी के पुत्र जगत सिंह को चांद कंवर ने अपना पुत्र माना ।*
*जयपुर के खजाने से चांद कंवर को हाथ खर्चा भी उदयपुर भेजा जाता था ।*
*मेवाड़ रियासत में जीवन भर गरीबों की मदद करने वाली राजकुमारी चांद कंवर के नाम पर ” चांदौड़ी” सिक्का भी* *चलाया गया । चांदी का यह* *सिक्का मेवाड़ रियासत में* ” *चांदौड़ी” रुपया कहलाता था ।*
*मेवाड़ के कवि आदित्य गिरी तीर्थ यात्रा पर गए तब महाराणा* *सज्जन सिंह ने उन्हे खर्च के पेटे पांच सौ “चांदौड़ी “रुपए दिए थे ।*
*यह रुपया मेवाड़ में प्रचलित भी* रहा ।*
*हवामहल का निर्माण कराने वाले जयपुर के महाराजा सवाई प्रताप सिंह के एक दर्जन राणियां पहले से ही जयपुर के रणवास में निवास करती थीं।*

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