लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
फरियादी की हथेली पर आदेश लिखने वाले दबंग गृहमंत्री चौधरी कुंभाराम भी बहुत चर्चित रहे थे।*
जितेन्द्र सिंह शेखावत
वरिष्ठ पत्रकार
कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने फरियादी की हथेली पर आदेश लिख कर मोहन लाल सुखाड़िया के समय गृह मंत्री रहे चौधरी कुंभाराम आर्य के जमाने की यादों को ताजा कर दिया ।
तब आज की तरह मोबाइल भी नहीं थे। ट्रेन या बस से जाते समय कुभांराम के पास कोई फरियादी आता तो हथेली पर अपने हस्ताक्षर कर कहते ” कलक्टर को दिखा देना काम हो जाएगा।
रतनगढ़ का एक किसान राजस्व मंत्री कुंभाराम आर्य के पास आया । ट्रेन में बैठने को वे निकले तब स किसान की हथेली पर ही आदेश लिख दिया था ।
राजस्व सचिव चतुर्वेदी ने मंत्री कुंभाराम आर्य को उनका आदेश कानून सम्मत नहीं होने की बात कही । चौधरी साहब ने सचिव को कहा … ” इस पर कुंभाराम आर्य कानून लिख दो ” और मेरे कहे अनुसार काम करो ।
आईएएस रहे निरंजन सिंह ने लिखा है कि
राजस्व सचिन ने कानून की किताब लाकर बताया कि आपके आदेश का पालन करना मुश्किल हैं। यह सुन कुंभाराम चौधरी ने कानून की किताब के पन्ने पर लाल स्याही की लकीर फेर उस धारा को काट दिया और कहां कि कानून हमने बनाया हैं । इसको रद्द करने का अधिकार भी हमारा है । शिक्षविद दयाराम महरिया ने बताया कि उस दौर में सबसे दबंग मंत्री चौधरी कुंभाराम का जबानी हुकम बहुत चर्चित रहा था। जनता में यह बात फैल गई कि कोई सरकारी काम अटक गया है तो कुंभाराम के पास जाओ ।
उन दिनों कच्चे रास्तों पर जीप फंस जाती तो कहते “फोर बाई फोर का कुंभाराम गियर क्यों नहीं लगाते ?
स्वर्गीय आर्य ने लिखा कि नौकरशाही सरकार और जनता के प्रति कतई जिम्मेदार नहीं है।
सरकारें तो बदलती रहती है लेकिन नौकरशाही हमेशा गैर जिम्मेदार बनी रहती है। जन प्रतिनिधि को तो जनता बदल सकती है लेकिन नौकरशाही को कभी आंच नहीं आती ।नौकरशाह एक ऐसा संगठन है जो वोट से बनने वाली सरकार में बिना वोट के शासन करता है । किसानों में सर्वाधिक लोकप्रिय रहे कुभां राम आर्य ने 1952 के विधान सभा के लिए हुए प्रथम चुनाव में चुरू से पर्चा भरने के बाद घर बैठे ही दस हजार वोटों से जीत हासिल करने का रिकार्ड कायम किया था । भैरोंसिंह शेखावत अक्सर चौधरी कुंभाराम से मिलने .दुर्गापुरा जाते रहते थे। पत्रकारों ने शेखावत को पूछा तब उन्होंने कहा कि चौधरी साहब से शासन चलाने का ज्ञान लेने जाता हूं ।
( जितेन्द्र सिंह खाचरिया वास की यह स्टोरी आज 3 दिसम्बर 2025 को राजस्थान पत्रिका में छपी है।)
