लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
मूंग और चना को बाहर रखना भेदभाव में भी भेदभाव — किसान महापंचायत
जयपुर ।
केंद्र सरकार द्वारा दलहन उपजों की शत-प्रतिशत खरीद की गारंटी की घोषणा पर रामपाल जाट, राष्ट्रीय अध्यक्ष — किसान महापंचायत, ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस घोषणा में मूंग और चना को शामिल न करना राजस्थान के किसानों के लिए “कटे घाव पर नमक छिड़कने” जैसा है।
राजस्थान में मूंग और चना की अहमियत
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मूंग उत्पादन में राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर है — राष्ट्रीय उत्पादन का लगभग 49% यहीं होता है।
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चना उत्पादन में राजस्थान का हिस्सा करीब 18% है, जो राज्य के किसानों के लिए आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
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इसके बावजूद इन दोनों उपजों को एमएसपी की 100% खरीद वाली सूची में शामिल नहीं किया गया है।
⚖️ “भेदभाव में भी भेदभाव”
रामपाल जाट ने कहा —
“अप्रैल 2023 में अरहर, उड़द और मसूर की शत-प्रतिशत खरीद की घोषणा पहले ही की जा चुकी थी। अब वही घोषणा दोहराई गई है, लेकिन मूंग और चना को फिर से बाहर रख दिया गया है।”
उन्होंने कहा कि दलहन में एमएसपी पर खरीद को पहले 25% तक सीमित रखा गया था। बाद में अरहर, उड़द और मसूर के लिए यह सीमा 40% और फिर 100% तक कर दी गई, लेकिन मूंग और चना के लिए रोक जस की तस है।
आंदोलन और वार्ताएं बेअसर
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किसान संगठन पिछले 6 वर्षों से इस भेदभाव को खत्म करने की मांग कर रहे हैं।
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कृषि मंत्रियों नरेंद्र सिंह तोमर और शिवराज सिंह चौहान से कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भरता की घोषणा भी मूंग और चना उत्पादक किसानों के लिए “अर्थहीन” साबित हुई है।
प्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल
रामपाल जाट ने कहा कि इस घोषणा के दौरान मुख्यमंत्री और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद थे, फिर भी किसी ने मूंग और चना को लेकर आपत्ति नहीं जताई।
“सरकार की इस घोषणा से किसानों को लाभ नहीं, बल्कि निराशा मिली है।” — रामपाल जाट
