लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
अनदेखी पर सभी 36 कौमों के साथ निर्दलीय उतरने की चेतावनी
भाजपा-कांग्रेस से टिकट और स्थानीय निकायों में प्रतिनिधित्व की मांग, समाज ने निर्णायक भूमिका वाले वार्ड चिह्नित किए
सत्यनारायण सेन गुरला
भीलवाड़ा। आगामी नगर निकाय चुनावों को लेकर भीलवाड़ा में सेन समाज ने अपनी राजनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। नगर निगम, नगर परिषद और जिले की विभिन्न नगर पालिकाओं में राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने को लेकर समाज के प्रबुद्धजनों और वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच बैठकों का दौर शुरू हो गया है।
सेन समाज ने भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के समक्ष करीब 10 वार्डों में टिकट देने की मांग रखने की तैयारी की है। इसके साथ ही जिले के अन्य स्थानीय निकायों में भी समाज को उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की मांग उठाई जा रही है।
पिछली अनदेखी का खामियाजा भुगत चुकी हैं पार्टियां
समाज के नेताओं का कहना है कि पिछले नगर परिषद चुनावों में भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रमुख दलों ने सेन समाज की अपेक्षा के अनुरूप प्रतिनिधित्व नहीं दिया था। इससे समाज में नाराजगी पैदा हुई और समाज ने अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में निर्दलीय प्रत्याशियों को मैदान में उतारा।
समाज के पदाधिकारियों के अनुसार इन क्षेत्रों में निर्दलीय प्रत्याशियों को समर्थन मिला और कई उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहे। इसके अलावा अन्य वार्डों में भी समाज के मतदाताओं ने एकजुट होकर मतदान किया, जिसका असर चुनाव परिणामों पर दिखाई दिया।
योग्य प्रत्याशियों को टिकट देने की मांग
सेन समाज के प्रबुद्धजनों का कहना है कि इस बार दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों को समाज की राजनीतिक भागीदारी को गंभीरता से लेना चाहिए। समाज की मांग है कि योग्य और जिताऊ प्रत्याशियों को प्राथमिकता के आधार पर टिकट दिया जाए।
समाज के नेताओं ने संकेत दिया है कि यदि इस बार भी उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो समाज अपने स्तर पर राजनीतिक विकल्प तैयार करने पर विचार करेगा।
सभी 36 कौमों को साथ लेकर निर्दलीय उतरने की तैयारी
समाज की ओर से कहा गया है कि यदि भाजपा और कांग्रेस ने अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं दिया तो सेन समाज सभी 36 कौमों को साथ लेकर भीलवाड़ा नगर निगम सहित जिले के अन्य स्थानीय निकायों में निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में उतार सकता है।
इनमें शाहपुरा, आसींद, गुलाबपुरा, मांडलगढ़, जहाजपुर और गंगापुर सहित अन्य नगर पालिका और नगर परिषद क्षेत्र शामिल हैं।
निर्णायक भूमिका वाले वार्डों पर नजर
समाज ने विशेष रूप से ऐसे वार्डों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है, जहां सेन समाज के मतदाताओं की संख्या चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की स्थिति में है। समाज की रणनीति इन वार्डों में मजबूत और स्थानीय स्तर पर सक्रिय प्रत्याशियों को आगे बढ़ाने की है।
आगामी दिनों में समाज के पदाधिकारियों की बैठकें आयोजित कर वार्डवार राजनीतिक स्थिति, संभावित प्रत्याशियों और अन्य सामाजिक संगठनों के साथ तालमेल को लेकर चर्चा किए जाने की संभावना है।
टिकट वितरण से पहले बढ़ेगा राजनीतिक दबाव
नगर निकाय चुनावों से पहले सेन समाज की सक्रियता ने भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए राजनीतिक समीकरणों को महत्वपूर्ण बना दिया है। समाज के नेताओं का दावा है कि यदि उनकी राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित नहीं की गई तो इसका असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है।
अब देखना होगा कि दोनों प्रमुख दल टिकट वितरण के दौरान सेन समाज की मांग को किस तरह तवज्जो देते हैं और समाज की ओर से आगे की रणनीति क्या तय की जाती है।
















































