लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
सवाई माधोपुर। जिले के चकेरी गांव में रविवार को डूंगरी बांध विरोध में एक ऐतिहासिक महापंचायत आयोजित की गई। महापंचायत की अध्यक्षता आंदोलन समिति ने की, जिसमें प्रदेशभर के राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, नेता, आंदोलनकारी और प्रभावित ग्रामीण शामिल हुए। अनुमानित एक लाख से अधिक लोग एकजुट होकर डूंगरी बांध योजना को रद्द करने की मांग लेकर जुटे।
महापंचायत में स्थानीय नेताओं गजानंद पटेल, रामस्वरूप पटेल, रामचीज सरपंच और पूर्व सरपंच राजेंद्र मीणा ने आंदोलनकारियों का स्वागत किया।
नेताओं और प्रमुख वक्ताओं की मौजूदगी
इस महापंचायत में पूर्व मंत्री राजेंद्र गुड़ा, श्योपुर विधायक बाबूलाल झंडेल, पूर्व विधायक मोतीलाल मीणा, कई प्रोफेसर, रिटायर्ड अधिकारी, पूर्व सांसद और अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
मंच संचालन भवानी सिंह मीणा और सीताराम बेरवा ने किया, जबकि मुकेश भूप्रेमी ने सभा में लिए गए निर्णय पढ़कर सुनाए।
वक्ताओं ने सरकार को चेताया कि जन विरोधी डूंगरी बांध की योजना को तत्काल प्रभाव से रोका जाए, और यह आंदोलन किसी भी हाल में शांतिपूर्ण लेकिन सशक्त रहेगा।
महापंचायत के प्रमुख निर्णय
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जब तक सरकार डूंगरी बांध की डीपीआर और नोटिफिकेशन सार्वजनिक नहीं करती, आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा।
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डीपीआर और नोटिफिकेशन सामने आने पर आंदोलन नई और कठोर दिशा में बढ़ेगा।
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इस वर्ष दीवाली को “काली दीवाली” के रूप में मनाया जाएगा और किसी भी खरीदारी का बहिष्कार किया जाएगा।
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नवंबर में सपोटरा क्षेत्र में विशाल चेतावनी सभा आयोजित होगी।
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बांध के पक्ष में या आंदोलन का समर्थन न करने वाले नेताओं/संगठनों का गांव-गांव में बहिष्कार किया जाएगा।
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हर घर पर आंदोलन का झंडा लगाया जाएगा और राजनीतिक दलों के झंडे-बैनर हटाए जाएंगे।
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हर महीने आंदोलन की दो रणनीतिक बैठकें होंगी।
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यदि सरकार कोई जबरन कदम उठाती है, तो आंदोलन कठोर रणनीति अपनाएगा।
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आंदोलन का समर्थन न करने वाले विधायक और सांसदों से इस्तीफा मांगा जाएगा और उनके घरों का घेराव किया जाएगा।
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आगामी पंचायती राज चुनाव का बहिष्कार सर्वसम्मति से तय किया गया।
ज्ञापन सौंपा गया
महापंचायत के अंत में, जिला कलेक्टर, सवाई माधोपुर को ज्ञापन सौंपा गया। इसमें डूंगरी बांध रद्द करने और सूरवाल बांध की समस्याओं को दूर करने की मांग रखी गई।
