लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
देश के सभी कानून मुख्यत जहां हिन्दू धर्म की व्याख्या की गई है ।
जैसे :
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम और हिंदू विवाह अधिनियम आदि कानून सिक्ख , बौद्ध ,जैन को भी हिंदू ही मानते हैं और यह कानून जैसे हिंदू व्यक्ति पर लागू होतें है वैसे ही बौद्ध पर भी लागू होते हैं ।
बौद्धों में विवाह पद्धति और संपति के अधिकार हिंदू जैसे ही हैं ! (हालांकि बौद्ध धर्म में विवाह करने की अपनी शैली विकसित कर ली है लेकिन यह हिंदू कानून अनुसार नहीं है)
जो दलित हिंदू धर्म त्याग कर बौद्ध धर्म स्वीकारने की बात करते हैं उन्हें यह समझना होगा कि वह धर्म परिवर्तन के उपरांत भी कुछ कानूनों की वजह से हिन्दू ही रहेंगे !
अतः धर्म को परिवर्तन करने से पूर्व एक बार अवश्य सोचें ।
साथ ही बौद्ध धर्म को धर्म के अनुसार नहीं बल्कि जीवन शैली के रूप में स्वीकार करें और अपने जीवन को बुद्ध के सिद्धांतों के अनुसार चलाए
सरल ,सात्विक ,वैज्ञानिक , मध्यम मार्गी और मानवतावादी दृष्टिकोण से ओतप्रोत ।
एक विचार ।
सीमा हिंगोनिया
