लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
नागौर (प्रदीप कुमार डागा)। शिव चरित्र कथा एवं शिव-पार्वती विवाहोत्सव के दूसरे दिन श्री राम सेवा आश्रम वृंदावन के संत श्री लक्ष्मण दास जी महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि ज्ञान की प्राप्ति के लिए मन में श्रद्धा होना आवश्यक है और ज्ञान ही व्यक्ति के जीवन में शालीनता लाता है। उन्होंने कहा कि धर्म के मार्ग पर चलकर ही सच्चे ज्ञान की प्राप्ति संभव है।
महाराज ने कहा कि घर टूटने का कारण स्त्री नहीं होती, बल्कि उसके पति, पुत्र, भाई या पिता का अपमान होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दक्ष द्वारा माता सती का अपमान किए जाने पर भगवान शिव ने क्रोधित होकर अपनी जटा से वीरभद्र को उत्पन्न किया।
कथा प्रसंग में उन्होंने बताया कि धर्म की प्रथम पत्नी श्रद्धा, दूसरी मैत्री, तीसरी दया और चौथी शांति है। कार्यक्रम के दौरान माँ गौरी का भव्य जन्मोत्सव मनाया गया तथा खिलौने, चॉकलेट आदि वितरित कर पुष्पवर्षा की गई। दूसरे दिन श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने के कारण बड़ी स्क्रीन की व्यवस्था भी की गई।
आयोजन मंडल के अशोक कल्ला ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत प्रतिदिन की भांति गणेश पूजन, षोडश मातृका पूजन एवं नवग्रह पूजन से हुई। पंडित बलभद्र के सानिध्य में यजमानों ने विधिवत पूजन किया। कथा दोपहर दो से पांच बजे तक चली, जिसके बाद सत्संग, आरती और प्रसाद वितरण हुआ।
चार दिवसीय कार्यक्रम के अंतर्गत तीसरे दिन गौरी मैया की तपस्या का प्रसंग सुनाया जाएगा।
इस अवसर पर श्री महर्षि जनार्दन गिरि पुष्टिकर माध्यमिक विद्यालय में संत लक्ष्मण दास जी का स्वागत व्यवस्थापक आनंद पुरोहित एवं प्रधानाध्यापक महेंद्र सिंह चारण ने किया। संत ने प्राचीन भारतीय शिक्षण पद्धति के अनुसार शिक्षा के साथ कौशल विकास को भी आवश्यक बताते हुए कहा कि पढ़ाई के साथ अतिरिक्त कौशल होना चाहिए, जिससे बेरोजगारी कम हो सके।