लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर (रूपनारायण सांवरिया)। शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा है कि भू-जल स्तर में लगातार गिरावट गंभीर चिंता का विषय है और इसे बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर ठोस कार्य किए जाने आवश्यक हैं। उन्होंने जल दोहन को नियंत्रित करने और अधिक से अधिक जल पुनर्भरण (वॉटर रिचार्ज) के उपाय अपनाने के निर्देश दिए।
मंत्री दिलावर मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 के तहत कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) को बढ़ावा देने के लिए आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जल स्तर सुधारने के लिए पौधारोपण, चारागाह विकास, तालाबों एवं एनीकेट (छोटे बांध) का निर्माण, विलुप्त नदियों का पुनर्जीवन और प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण अत्यंत जरूरी है। साथ ही प्राकृतिक जल मार्गों में आई बाधाओं को दूर कर जल प्रवाह को पुनर्स्थापित करने पर भी जोर दिया।
उन्होंने प्रत्येक ग्राम पंचायत में गौवंश संरक्षण की कार्य योजना बनाने और प्लास्टिक व पॉलीथिन के उपयोग को बंद करने का भी संकल्प दिलाया। साथ ही “डार्क जोन” के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए।
पंचायती राज राज्य मंत्री ओटाराम देवासी ने कहा कि जल स्वावलंबन अभियान का मुख्य उद्देश्य बहते पानी को रोककर उसका संरक्षण करना है। उन्होंने सिरोही जिले में जल स्तर में सुधार का उदाहरण देते हुए वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
कार्यशाला गुरुवार को पंत कृषि भवन, जयपुर में आयोजित की गई, जिसमें पंचायती राज विभाग के शासन सचिव एवं आयुक्त डॉ. जोगाराम तथा जल ग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग की निदेशक कल्पना अग्रवाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यशाला में 1 दिसंबर 2025 को आयोजित सीएसआर कॉन्फ्रेंस की समीक्षा करते हुए लगभग 140 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की प्रगति पर चर्चा की गई। इस दौरान विभिन्न संस्थाओं के साथ एमओयू भी किए गए और जल संरक्षण से जुड़े नवाचारों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
अधिकारियों और सीएसआर प्रतिनिधियों ने भी अपने सुझाव प्रस्तुत किए। कार्यशाला में जल स्वावलंबन अभियान 2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी से जल संरक्षण को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
