Home latest भावा वैदिक शिविर में गूंजे काव्य के स्वर, कवियों ने बांधा समां

भावा वैदिक शिविर में गूंजे काव्य के स्वर, कवियों ने बांधा समां

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

राजसमंद, गौतम शर्मा। भावा गांव में महर्षि वेदव्यास सनातन वैदिक शिक्षण सेवा संस्थान द्वारा आयोजित 15 दिवसीय पंचम वैदिक संस्कार शिविर के अंतर्गत रविवार रात्रि को साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। काव्य गोष्ठी मंच राजसमंद के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न रसों से सजी कविताओं ने श्रोताओं को देर रात तक मंत्रमुग्ध बनाए रखा।

कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्थान के पदाधिकारियों ने सभी आमंत्रित कवियों का उपरना ओढ़ाकर एवं तिलक लगाकर स्वागत किया। इस अवसर पर संस्थान के संरक्षक ओम प्रकाश शर्मा, अध्यक्ष गोविंद शर्मा, सचिव विष्णु शर्मा, कोषाध्यक्ष पवन तिवारी सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

कवि सम्मेलन का शुभारंभ युवा कवि नरेंद्र सिंह रावल ने सरस्वती वंदना से किया। इसके पश्चात कवि प्रकाश जांगिड़ ‘प्रांश’ ने अपनी रचना “राम काज को आये हैं, राम काज हम कर लें क्या” प्रस्तुत कर राम मंदिर निर्माण की भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। उनकी प्रस्तुति पर पूरा पंडाल जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा।

प्रख्यात कवि सतीश आचार्य ने मेवाड़ की वीरता और सनातन संस्कृति का गौरवगान करते हुए अपनी ओजपूर्ण रचनाएं सुनाईं। उनकी पंक्तियां “जब लोग दुनिया में नंगे डोल रहे थे, तोते यहां के वेदमंत्र बोल रहे थे” श्रोताओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं और खूब तालियां बटोरीं।

कवि परितोष पालीवाल ने राम मंदिर आंदोलन और रामलला ध्वजारोहण समारोह का भावपूर्ण वर्णन किया, जबकि युवा कवि नरेंद्र सिंह रावल (सोनियाणा) ने इतिहास और स्वाभिमान से जुड़ी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को भावुक कर दिया।

कवि जितेंद्र पालीवाल ने “धर्म युद्ध में धर्म ही जीते दुनिया को समझाने को, चक्र सुदर्शन चलता है” जैसी ओजस्वी पंक्तियों के माध्यम से धर्म और सत्य की विजय का संदेश दिया। वहीं गोपाल शर्मा (केलवाड़ा) ने हास्य एवं वीर रस की प्रस्तुतियों से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया।

कार्यक्रम का प्रभावी संचालन सूर्य प्रकाश दीक्षित ने किया। उन्होंने अपनी काव्य प्रस्तुतियों से आयोजन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। माता-पिता के त्याग और प्रेम पर आधारित उनकी मार्मिक पंक्तियां “सब कुछ बदल जाए पर वो नहीं बदलती है, मां-बाप की जवानी है तस्वीरों में” सुनकर श्रोता भावुक हो उठे।

अंत में संस्थान की ओर से सभी कवियों एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया। साहित्य, संस्कार और राष्ट्रभक्ति के संदेश से परिपूर्ण इस आयोजन ने उपस्थित जनसमूह के मन पर गहरी छाप छोड़ी।

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