लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर। (रूपनारायण सांवरिया)
पेपर लीक मामले को लेकर राजस्थान की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है। भाजपा प्रदेश प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कार्यकाल में पेपर लीक की घटनाओं पर कितने मंत्रियों से इस्तीफे लिए गए थे।
उन्होंने कहा कि भाजपा संसद में पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर खुली और सार्थक चर्चा चाहती है, लेकिन कांग्रेस और विपक्षी दल सदन की कार्यवाही बाधित कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में रुकावट पैदा कर रहे हैं।
भाजपा बोली- विपक्ष चर्चा से बच रहा है
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में एनडीए सांसदों ने संसद के मुख्य द्वार पर कांग्रेस द्वारा लगातार सदन की कार्यवाही बाधित करने के विरोध में प्रदर्शन किया।
उन्होंने कहा कि भाजपा पेपर लीक के मुद्दे पर व्यापक चर्चा और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के पक्ष में है, लेकिन विपक्ष चर्चा से बच रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस युवाओं के भविष्य की चिंता करने के बजाय इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है।
डोटासरा के बयान पर साधा निशाना
भाजपा प्रदेश प्रभारी ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि जब डोटासरा शिक्षा मंत्री थे, उस समय रीट (REET) परीक्षा पेपर लीक प्रकरण सामने आया था।
उन्होंने कहा कि उस समय डोटासरा पर इस्तीफे की मांग उठी थी, लेकिन उन्होंने यह कहकर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया था कि परीक्षा आयोजन की जिम्मेदारी अधिकारियों की होती है। डॉ. अग्रवाल ने सवाल उठाया कि आज वही डोटासरा केंद्रीय शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
गहलोत से पूछा सवाल
डॉ. अग्रवाल ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से सवाल किया कि यदि वे पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, तो क्या उन्होंने अपने कार्यकाल में रीट पेपर लीक प्रकरण के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को मंत्रिमंडल से हटाया था?
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पहले अपने शासनकाल की जवाबदेही तय करनी चाहिए और उसके बाद ही दूसरों पर सवाल उठाने चाहिए।
तबादलों को लेकर भी कांग्रेस पर हमला
भाजपा नेता ने नवंबर 2021 में जयपुर में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शिक्षकों से सार्वजनिक रूप से पूछा था कि क्या तबादलों के लिए पैसे देने पड़ते हैं, जिस पर शिक्षकों ने सहमति जताई थी।
उन्होंने कहा कि उस समय गोविंद सिंह डोटासरा शिक्षा मंत्री थे, लेकिन इसके बावजूद तत्कालीन सरकार ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस को नैतिकता की बात करने से पहले अपने शासनकाल के फैसलों और जिम्मेदारियों पर आत्ममंथन करना चाहिए।
